
तिरुवनंतपुरम, 24 अगस्त . केरल में सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के भीतर उप नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. एलडीएफ की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) ने Monday को इस मुद्दे पर अपना रुख और सख्त कर दिया.
अब सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव डी राजा भी इस विवाद में खुलकर सामने आ गए हैं. उन्होंने साफ कहा कि एलडीएफ के अध्यक्ष और पूर्व Chief Minister पिनाराई विजयन सहयोगी दलों की मांगों को नजरअंदाज नहीं कर सकते और उन्हें उनकी चिंताओं को ध्यान में रखना होगा.
डी राजा का हस्तक्षेप इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उप नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल सीपीआई (एम) और सीपीआई के बीच का मामला नहीं रह गया है, बल्कि सार्वजनिक रूप से चर्चा का विषय बन चुका है.
सीपीआई नेतृत्व अब विजयन के सार्वजनिक रुख को एलडीएफ नेतृत्व के सामने उठाने की तैयारी कर रहा है, जबकि यह मुद्दा अब तक दोनों दलों के बीच द्विपक्षीय बातचीत का हिस्सा था.
यह घटनाक्रम वाम गठबंधन की दो प्रमुख पार्टियों के बीच मतभेदों के अब खुलकर सामने आने का संकेत माना जा रहा है.
सीपीआई अपने राज्य सचिव बिनॉय विश्वम को उप नेता प्रतिपक्ष का पद देने की मांग कर रही है. बिनॉय विश्वम ने कई बार सार्वजनिक रूप से यह मांग उठाई है.
हालांकि, पिनाराई विजयन ने इस मांग को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.
विवाद उस समय फिर तेज हो गया जब विजयन ने सार्वजनिक रूप से यह जानकारी दी कि सीपीआई ने इस पद को लेकर एक पत्र भेजा है.
इसके जवाब में बिनॉय विश्वम ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी मांग पूरी तरह उचित है और पूर्व Chief Minister को इस मामले में अधिक परिपक्वता दिखानी चाहिए. अब डी राजा के हस्तक्षेप से सीपीआई के रुख को राष्ट्रीय स्तर का समर्थन मिल गया है.
सूत्रों के अनुसार, गठबंधन के अन्य सहयोगी दल भी इस गतिरोध और इस मुद्दे को संभालने के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं.
Government के 100 दिन पूरे होने के साथ उप नेता प्रतिपक्ष का मुद्दा Political रूप से और अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है. कई लोग मानते हैं कि विपक्षी गतिविधियों में समन्वय की कमी का एक कारण यह विवाद बढ़ रहा है.
सीपीआई का राज्य नेतृत्व अब एलडीएफ अध्यक्ष के रूप में पिनाराई विजयन के खिलाफ और कड़ा रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है. साथ ही, गतिरोध खत्म करने के लिए वाम दलों के राष्ट्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप की भी उम्मीद कर रहा है.
–
एएमटी/डीकेपी