
नैरोबी, 19 सितंबर . केन्या में India के उच्चायुक्त आदर्श स्वाइका ने Saturday को अफ्रीकी देश के विदेश मामलों के प्रधान सचिव कोरिर सिंगओई से मुलाकात की और आगामी उच्च स्तरीय आदान-प्रदान से संभावित परिणामों की समीक्षा की.
केन्या में भारतीय उच्चायोग ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, “उच्चायुक्त आदर्श स्वाइका ने विदेश मामलों के प्रधान सचिव कोरिर सिंगओई से मुलाकात की. उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की, जिसमें चल रही पहलों की प्रगति और आगामी उच्च स्तरीय आदान-प्रदान से संभावित परिणाम शामिल हैं.”
उन्होंने आगे कहा कि उच्चायुक्त ने बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों पर प्रकाश डाला और निवेशक-अनुकूल कारोबारी माहौल के महत्व को रेखांकित किया.
पिछले महीने उच्चायुक्त स्वाइका ने केन्या के Prime Minister कैबिनेट सचिव (पीसीएस) और विदेश और प्रवासी मामलों के कैबिनेट सचिव मुसालिया डब्ल्यू मुदावादी से मुलाकात की थी और उन्हें हाल के द्विपक्षीय घटनाक्रमों से अवगत कराया था.
नैरोबी में भारतीय उच्चायोग ने एक्स पर लिखा, “उच्चायुक्त आदर्श स्वाइका ने Prime Minister कैबिनेट सचिव और विदेश और प्रवासी मामलों के कैबिनेट सचिव महामहिम डॉ. मुसालिया डब्ल्यू मुदावादी से मुलाकात की. उच्चायुक्त ने पीसीएस को हाल के द्विपक्षीय घटनाक्रमों से अवगत कराया और साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रस्तावों और विचारों पर चर्चा की.”
केन्या की नेशनल असेंबली के स्पीकर मोजेस वेतांगुला ने भी India और केन्या के बीच संसदीय आदान-प्रदान को मजबूत करने के लिए अगस्त में India का दौरा किया था, जिसमें हाल ही में गठित संसदीय मित्रता समूह भी शामिल हैं.
वेतांगुला ने Lok Sabha अध्यक्ष ओम बिरला के साथ बैठक की और कहा कि केन्या और India के बीच लंबे समय से अच्छी दोस्ती है और दोनों पार्लियामेंट के बीच मजबूत लेजिस्लेटिव लेन-देन होता है.
स्पीकर बिरला के अनुसार, इस बैठक ने India और केन्या के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता पर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और एक समान ऐतिहासिक विरासत में निहित है.
बिरला ने एक्स पर लिखा, “दोनों देशों में हाल ही में गठित संसदीय मित्रता समूह संसदीय जुड़ाव को गहरा करने, हमारी दोनों संसदों के बीच अधिक समझ को बढ़ावा देने और लोगों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेंगे.”
उनके अनुसार, विधायी अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने से संस्थागत सहयोग को और गहरा किया जा सकता है.
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केके/डीकेपी