
कोच्चि, 11 सितंबर . केरल हाईकोर्ट ने Friday को एसएनडीपी माइक्रोफाइनेंस धोखाधड़ी मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी देने में हुई देरी को लेकर राज्य Government को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या बार-बार हो रही ये चूक जानबूझकर की जा रही हैं और इनका मकसद मुकदमा चलाने में देरी करना है.
पिछड़ा वर्ग विकास विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव के व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने और यह कहने के बाद कि उन्हें मामले की फाइलें केवल Thursday को मिली थीं, जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने गहरी नाराजगी जताई.
कोर्ट ने पिछले महीने ही निर्देश दिया था कि मुकदमा चलाने की मंजूरी के सवाल पर विचार किया जाए, हालांकि विजिलेंस के विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि बातचीत में कमी (कम्युनिकेशन गैप) के कारण फाइलें अतिरिक्त मुख्य सचिव के सामने केवल Thursday देर शाम ही रखी जा सकीं.
कोर्ट को बताया गया कि फाइलें अब संबंधित अधिकारी को भेज दी गई हैं और एक हफ्ते के भीतर कार्रवाई की जाएगी. जस्टिस बदरुद्दीन ने स्पष्ट किया कि Government अब देरी के कारण के तौर पर फाइलें न मिलने का हवाला दोबारा नहीं दे सकती. उन्होंने निर्देश दिया कि 18 सितंबर को मामले की सुनवाई से पहले इस पर कोई फैसला लिया जाए.
कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर आदेश पेश नहीं किया गया, तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा.
जज ने राज्य के इस स्पष्टीकरण पर भी कड़ी आपत्ति जताई कि यह एक गलती थी. कोर्ट ने कहा कि गलती किसी से भी हो सकती है लेकिन साथ ही यह भी कहा कि बार-बार होने वाली चूक को गलती नहीं माना जा सकता और ये गलत इरादों के साथ जानबूझकर की गई कार्रवाई हो सकती है.
कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के चुनिंदा रवैये पर भी सवाल उठाए. जज ने राज्य से पूछा, “आप कुछ आरोपियों को अभियोजन से क्यों बचा रहे हैं और कुछ ऐसे आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों कर रहे हैं जिनसे आपके अच्छे संबंध नहीं हैं?”
जस्टिस बदरुद्दीन ने कहा कि इस तरह के पक्षपाती रवैये को स्वीकार नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब मामला सार्वजनिक ओहदे वाले लोगों से जुड़े गंभीर अपराधों का हो. ये सब मामले को टालने के तरीके हैं और चेतावनी दी कि इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा.
यह मामला एसएनडीपी योगम से जुड़ी माइक्रोफाइनेंस योजना में अनियमितताओं से संबंधित है.
विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो ने एसएनडीपी के पदाधिकारियों के खिलाफ आरोपों के संबंध में कई मामले दर्ज किए थे, जिनमें महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन और केरल राज्य पिछड़ा वर्ग विकास निगम के पूर्व प्रबंध निदेशक शामिल हैं.
हाईकोर्ट 2020 में दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें इन मामलों की जांच के लिए एक कुशल अधिकारी की अध्यक्षता में एसआईटी (विशेष जांच दल) के गठन की मांग की गई थी. इस मामले पर अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी.
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एएसएच/वीसी