कांग्रेस राजनीतिक स्वार्थ के लिए संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को पहुंचा रही नुकसान: संबित पात्रा

New Delhi, 26 सितंबर . भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद डॉ. संबित पात्रा ने Saturday को Odisha के भुवनेश्वर में मीडिया को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि आज चुनाव आयोग के तीनों कमिश्नरों की बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति ने कांग्रेस के आरोपों को स्पष्ट किया है. चुनाव आयोग ने बताया कि एसआईआर पर तीनों कमिश्नरों की पूर्ण सहमति थी और कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ बैठक किसी नीतिगत विषय पर नहीं, बल्कि डेपुटेशन पर आए अधिकारी से संबंधित औपचारिक विषय पर हुई थी.

डॉ. पात्रा ने कहा कि कांग्रेस अपने Political स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग, Supreme Court और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है. उन्होंने कहा कि जनता के समक्ष तथ्यों को रखना आवश्यक है, ताकि संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा और लोकतांत्रिक व्यवस्था सुरक्षित रहे.

डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि सभी को पता है कि परसों किस प्रकार एक नामी अंग्रेजी अखबार में चुनाव आयोग पर कुछ आर्टिकल छपने के पश्चात तमाम विपक्षी पार्टियों और खासकर कांग्रेस पार्टी ने हमलावर तेवर में चुनाव आयोग ऑफ इंडिया और भारतीय जनता पार्टी पर हमला किया था. उनका दावा था कि चुनाव आयोग और भाजपा मिली हुई हैं और कहीं न कहीं India के लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ कर रही हैं. इस कारण से भाजपा ने प्रेस वार्ता के माध्यम से अपना विषय जनता के सामने रखा था और बड़े स्पष्ट रूप से अपनी प्रेस वार्ता में यह बताया था कि तथ्य क्या थे. कांग्रेस पार्टी ने किस प्रकार विगत दिनों में चुनाव आयोग के साथ खिलवाड़ किया था और किस प्रकार Supreme Court इत्यादि की मोहर एसआईआर पर लगी हुई है. एसआईआर की जो प्रक्रिया तीसों राज्य के लिए चुनाव आयोग ने निकाली थी, उसमें तीनों इलेक्शन कमिश्नरों की सर्वसम्मति थी. आज दोपहर 3 बजे चुनाव आयोग के तीनों कमिश्नरों की बैठक हुई और उसके पश्चात चुनाव आयोग ने एक सार्वजनिक प्रेस विज्ञप्ति जारी किया है.

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि चुनाव आयोग ने महत्वपूर्ण बातें बताई हैं और एक Political पार्टी होने के नाते यह हमारा कर्तव्य है कि इन बातों को जनता और देश के समक्ष रखा जाए कि किस प्रकार अपने स्वार्थ के लिए कांग्रेस पार्टी संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रही है और किस प्रकार वह संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को तार-तार करना चाहती है. आज की बैठक के बाद चुनाव आयोग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में सबसे महत्वपूर्ण विषय यह है कि चुनाव आयोग और मुख्यतः भाजपा को लेकर जो आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयोग के अंदर तीनों कमिश्नरों के बीच सहमति नहीं थी, वह विषय इतना गंभीर हो गया था कि कैबिनेट सेक्रेटरी तक गया और उन्हें इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा. साथ ही, यह आरोप लगाया गया था कि भाजपा अपने बचाव के लिए चुनाव आयोग को प्यादे के रूप में इस्तेमाल कर रही है. यह एक बात स्पष्ट रूप से दिखाती है और वह है कांग्रेस पार्टी में परिपक्वता की कमी और देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की एक साजिश. कांग्रेस पार्टी में अपने विषयों को प्रस्तुत करने में परिपक्वता नहीं है. ऐसा नहीं है कि वह अपरिपक्वता में यह सब कर रहे हैं. उनका उद्देश्य किसी भी कीमत पर सत्ता हासिल करना है और इसके लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.

डॉ. पात्रा ने कहा कि गिरने में भी जिस प्रकार का प्रदर्शन कांग्रेस पार्टी का रहा है, वह अपरिपक्व है. इस प्रकार देश के लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हमला नहीं होता है. 2014 के पश्चात कांग्रेस पार्टी के इतिहास को देखें तो ऐसी कोई संस्था नहीं है जिस पर कांग्रेस पार्टी ने हमला नहीं किया हो. भारतवर्ष की किसी Political पार्टी ने भारतीय सेना के ऊपर हमला नहीं किया है, मगर कांग्रेस पार्टी और उससे जुड़ी कुछ सहयोगी पार्टियों ने भारतीय सेना पर भी हमला किया है. सर्जिकल स्ट्राइक हो या एयर स्ट्राइक, उन्होंने उसके भी सबूत मांगे हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने डीजीएमओ यानी डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशंस जैसे भारतीय सेना के महत्वपूर्ण पद पर बैठे अधिकारी को भी झूठा और एजेंट कहा था. यहां तक कि Supreme Court के जजों के ऊपर भी कांग्रेस पार्टी ने जिस प्रकार का हमला किया और उन्हें भी कठपुतली बताया, वह दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी ने किसी भी संस्था को नहीं छोड़ा है.

डॉ. संबित पात्रा ने कहा कि आज की इस चिट्ठी में बड़े स्पष्ट रूप से बताया गया है कि कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ हुई बैठक एक औपचारिक बैठक थी और उसका रिकॉर्ड भी रखा जाता है. यह केवल सामान्य बैठक नहीं थी, जिसका कोई लेखा-जोखा न हो. चुनाव आयोग ने स्पष्ट रूप से बताया है कि कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ हुई बैठक चुनाव आयोग के किसी नीतिगत मामले या आईटी विभाग से संबंधित किसी विषय को लेकर नहीं थी. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य डेपुटेशन पर चुनाव आयोग में आए एक अधिकारी के विषय में चर्चा करना था. डेपुटेशन पर अधिकारी आते हैं और उनके विषय में Government के विभिन्न स्तरों पर चर्चा होती है. उसी विषय पर कैबिनेट सेक्रेटरी के साथ बैठक हुई थी. कांग्रेस पार्टी ने इस बैठक को असहमति के कारण हुई चर्चा के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि आज चुनाव आयोग की चिट्ठी में स्पष्ट रूप से यह बात सामने आई है कि एसआईआर तीनों कमिश्नरों के हस्ताक्षर और पूर्ण सहमति के साथ हुआ है. एसआईआर पूरे देश के लिए 24 जून 2025 को जारी हुआ था. इसे कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी और उस समय भी भाजपा ने Supreme Court के निर्णय का उल्लेख करते हुए बताया था कि 27 मई 2026 को देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर को वैध माना था और कहा था कि एसआईआर किया जा सकता है. तीनों कमिश्नर एसआईआर के विषय पर एकमत थे और सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसके पक्ष में निर्णय दिया था. कैबिनेट सेक्रेटरी के पास जाना भी किसी नीतिगत विषय को लेकर नहीं हुआ था. इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे विषय को लेकर हमला करने की कोशिश की.

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी यह बात समझ लेनी चाहिए कि इस देश की जनता में समझदारी है. जनता जानती है कि आखिरकार विपक्ष यह सब क्यों कर रहा है. किसी भी कीमत पर सत्ता प्राप्त करना ही राहुल गांधी का लक्ष्य है. राहुल गांधी सत्ता प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं और इसी कारण चुनाव आयोग, Supreme Court तथा India की संवैधानिक संस्थाओं पर आक्रमण कर रहे हैं. उनका मोटो है कि हम जीत नहीं सकते हैं, इसलिए लोकतंत्र के खेल को ही बिगाड़ देते हैं, जिसको हम साधारण हिंदी में कहते हैं कि “हमें नहीं मिल रहा है, तो चलो खीर खिंडा देते हैं ताकि किसी को भी न मिले.” मगर India जैसे महान देश में इस प्रकार संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने के बाद जनता कांग्रेस और राहुल गांधी को क्षमा कर दे, ऐसा नहीं हो सकता है. राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी आज एक बार फिर बेनकाब हो गए हैं. आज चुनाव आयोग ने जो सार्वजनिक बयान जारी किया है, उसके अंतिम पेज पर एक तस्वीर है, जिसमें तीनों कमिश्नर एक साथ बैठे हुए हैं. तीनों कमिश्नर एक साथ बैठकर यह प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रहे हैं, जिस प्रकार चुनाव आयोग के ऊपर हमला किया जा रहा था, आज दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है.

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एमएस/

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