
हुबली, 29 सितंबर . कर्नाटक के विभिन्न जिलों के किसानों ने Tuesday को हुबली में अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया. उन्होंने गन्ने की न्यूनतम कीमत 5,500 रुपए प्रति टन, चीनी की न्यूनतम विक्रय कीमत में वृद्धि और डॉ. एमएस स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की मांग की.
हजारों किसान कित्तूर रानी चेन्नम्मा सर्कल पर जमा हुए. बाद में उन्होंने Union Minister प्रल्हाद जोशी के आवास के पास विरोध प्रदर्शन किया और केंद्र Government के खिलाफ नारे लगाते हुए चेतावनी दी कि उनकी मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.
कर्नाटक राज्य रायथा संघ और हसिरू सेना ने इस प्रदर्शन का आयोजन किया, जिसमें धारवाड़, बेलगावी और अन्य जिलों के किसानों ने भाग लिया. आयोजकों ने बताया कि 2,000 से अधिक किसान इकट्ठा हुए थे.
शुरुआत में किसानों ने जोशी के हुबली स्थित कार्यालय का घेराव करने की योजना बनाई थी, लेकिन Police द्वारा अनुमति न दिए जाने के बाद वे नेहरू मैदान की ओर मुड़ गए. बाद में वे चेन्नम्मा सर्कल से Union Minister के आवास की ओर बढ़े.
जोशी के कार्यालय और आवास के आसपास भारी Police बल तैनात किया गया था और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए थे. कुछ किसानों द्वारा बैरिकेड्स हटाने के प्रयास के कारण कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई. नेहरू मैदान और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों के आसपास 250 से अधिक Policeकर्मी तैनात किए गए थे.
हुबली की कई प्रमुख सड़कों पर किसानों के धरने के कारण यातायात बाधित हो गया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं जो कई किलोमीटर तक फैली हुई थीं.
किसानों ने Government से कृषि उपज के लिए वैज्ञानिक रूप से निर्धारित लाभकारी मूल्य घोषित करने, चालू पेराई सत्र के लिए गन्ने का न्यूनतम मूल्य 5,500 रुपए प्रति टन तय करने और चीनी कारखानों का संचालन सुनिश्चित करने की मांग की. उन्होंने बढ़ती खेती लागत का हवाला देते हुए चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य को 31 रुपए प्रति किलो से बढ़ाकर 60 रुपए प्रति किलो करने की भी मांग की.
किसान नेता चुन्नप्पा पुजारी ने कहा कि 2019 और 2026 के बीच खेती लागत लगभग तीन गुना बढ़ गई है. उन्होंने मांग की कि गन्ने की कीमतें कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) द्वारा प्रस्तुत अनुमानों के आधार पर वैज्ञानिक रूप से निर्धारित की जाएं. उन्होंने 2025-26 सत्र के दौरान गन्ना आपूर्ति करने वाले किसानों को 300 रुपए प्रति टन का अतिरिक्त भुगतान करने की भी मांग की.
पुजारी ने केंद्र और राज्य Government से किसानों के ऋण पूरी तरह माफ करने की भी मांग की और फसल हानि मुआवजे के रूप में केवल 2,500 रुपए दिए जाने के लिए राज्य Government की आलोचना की.
किसानों ने महादयी सिंचाई परियोजना को लागू करने, सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने, गन्ने के लिए उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) का वैज्ञानिक निर्धारण करने और राज्य के संपूर्ण इथेनॉल उत्पादन की खरीद की भी मांग की.
–
एमएस/