
Bengaluru, 1 अक्टूबर . कर्नाटक में वोटर लिस्ट और फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं. Chief Minister डीके शिवकुमार की ओर से भाजपा और संघ पर फॉर्म-7 का कथित तौर पर दुरुपयोग कर मुस्लिम, दलित और आदिवासी मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन देने का आरोप लगाए जाने पर कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाड़ी नारायण स्वामी ने पलटवार किया है. उन्होंने इन आरोपों को कांग्रेस का ‘ड्रामा’ बताते हुए कहा कि फॉर्म-7 चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी आवेदन के आधार पर तुरंत किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया जा सकता.
चलवाड़ी नारायण स्वामी ने से बातचीत में कहा कि यह कोई षड्यंत्र नहीं, बल्कि कांग्रेस की ओर से किया जा रहा ‘हाई ड्रामा’ है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग को निशाना बनाने के बहाने Prime Minister Narendra Modi और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को Political रूप से निशाना बना रही है. फॉर्म-7 को लेकर उन्होंने कहा कि इसे भरने का अधिकार किसी व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के तहत है और इसमें किसी Political दल के लिए अलग नियम नहीं हैं. कांग्रेस और भाजपा के लिए अलग-अलग फॉर्म नहीं हैं. फॉर्म-6 हो या फॉर्म-7, प्रक्रिया सभी के लिए समान है.
उन्होंने कहा कि मतदाता के आवेदन में यह घोषणा महत्वपूर्ण है कि वह India का नागरिक है और किसी दूसरे देश का नागरिक नहीं है. अगर किसी आवेदन में गड़बड़ी पाई जाती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है. उन्होंने बांग्लादेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में होने के आरोपों का भी जिक्र किया और कहा कि अगर कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है तो उसकी जांच कर उसे मतदाता सूची से हटाना प्रक्रिया का हिस्सा है. हालांकि, उन्होंने इस संदर्भ में कांग्रेस पर Political आरोप भी लगाए और दावा किया कि इसी वजह से पार्टी को आपत्ति हो रही है.
जब उनसे पूछा गया कि भाजपा कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर प्रिंटेड फॉर्म में एक साथ कई नाम देकर जांच और नाम हटाने के लिए आवेदन करने को कहा जा रहा है, तो नारायण स्वामी ने कहा कि केवल फॉर्म-7 दाखिल होने से किसी मतदाता का नाम तुरंत नहीं हटाया जा सकता. इस संबंध में पहले आवेदन की जांच होगी. संबंधित व्यक्ति से दस्तावेज और आवश्यक जानकारी मांगी जा सकती है. प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि नाम मतदाता सूची में रहेगा या हटाया जाएगा. अगर संबंधित मतदाता आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा देता है तो उसका नाम हटाने का सवाल नहीं है.
नारायण स्वामी ने कहा कि यह पूरी तरह एक प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे लेकर इतना बड़ा Political विवाद खड़ा करने की जरूरत नहीं है. वोटर लिस्ट की समीक्षा समय-समय पर होती रहती है. इसमें कांग्रेस समर्थक और भाजपा समर्थक के लिए अलग-अलग व्यवस्था नहीं हो सकती. कांग्रेस का वास्तविक निशाना केवल चुनाव आयोग नहीं है. चुनाव आयोग के मुद्दे को उठाकर भाजपा, आरएसएस, Prime Minister Narendra Modi और गृह मंत्री अमित शाह को निशाना बनाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस के पास केंद्र Government के खिलाफ भ्रष्टाचार या अन्य मुद्दों को लेकर ठोस सवाल हैं तो उन्हें उठाया जा सकता है, लेकिन वोटर लिस्ट की प्रक्रिया को लेकर इस तरह का हंगामा करना उचित नहीं है. उन्होंने इसे Political मुद्दा बताते हुए कहा कि इससे कोई वास्तविक समाधान नहीं निकलेगा.
कर्नाटक लोक सेवा आयोग यानी केपीएससी से जुड़े कथित घोटाले पर नारायण स्वामी ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कथित अनियमितताओं से जुड़े तथ्य धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं. मामले में ओएमआर शीट और नंबरों में कथित बदलाव जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं और इसके पीछे कई लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए. इस मामले में कुछ मंत्रियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
उन्होंने आगे कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और अगर किसी की संलिप्तता साबित होती है तो उसे जेल जाना पड़ेगा.
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पीएसके