
चामराजनगर (कर्नाटक), 26 अगस्त . कर्नाटक के चामराजनगर जिले में मद्दुर के पास वन विभाग की एक टीम ने 12 साल की एक बाघिन को पकड़ा. यह बाघिन इंसानी बस्तियों के पास के इलाकों में आ गई थी, जिससे वहां के लोगों में डर और घबराहट फैल गई थी.
माना जा रहा है कि बाघिन के सीने में चोट लगी है. वह मड्डुर कॉलोनी और आसपास के रिहायशी इलाकों में घूम रही थी और शायद जंगल वापस नहीं लौट पा रही थी. वन अधिकारियों को शक है कि किसी दूसरे बाघ के साथ लड़ाई में उसे यह चोट लगी होगी.
इस बाघिन की मौजूदगी से कई दिनों तक स्थानीय ग्रामीण डरे हुए थे. आखिरकार, वन विभाग के लंबे ऑपरेशन के बाद इसे पकड़ने पर लोगों ने राहत की सांस ली.
Tuesday को गुंड्लुपेट तालुक के मड्डुर गांव के रहने वाले राजेंद्र नाम के एक युवक ने अपने खेत में काम करते समय बाघिन को देखा. बताया जाता है कि यह जानवर उससे कुछ ही मीटर की दूरी पर आ गया था, जिससे वह हैरान और डर गया.
जान बचाने के लिए राजेंद्र तुरंत गांव की ओर भागा और सुरक्षित बच निकला. इस घटना के बाद ग्रामीणों को सतर्क किया गया और उन्होंने तुरंत बांदीपुर वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी.
वन अधिकारियों की एक टीम मौके पर पहुंची और जानवर का पता लगाने के लिए ऑपरेशन शुरू की. ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल करके अधिकारियों ने बाघिन की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी और उसकी लोकेशन का पता लगाया.
इसके बाद वन विभाग ने रात भर चले लंबे ऑपरेशन के बाद बाघिन को सुरक्षित पकड़ लिया.
उम्मीद है कि अधिकारी जानवर की विस्तृत मेडिकल जांच करेंगे, खासकर उसके सीने की चोट का पता लगाने के लिए. उसके इलाज, पुनर्वास या उसे छोड़ने का फैसला उसकी सेहत की हालत के आधार पर किया जाएगा.
रिहायशी इलाकों और खेतों के पास घायल बाघिन की आवाजाही से ग्रामीणों, खासकर किसानों और आसपास के इलाकों में काम करने वाले लोगों में काफी चिंता थी. अब जानवर को पकड़ लिया गया है, तो निवासियों ने राहत की सांस ली है.
लगभग पांच दशकों में पहली बार हम्पी के पास के जंगलों में बाघ देखा गया है, जो इस इलाके में इस बड़े जानवर की दुर्लभ वापसी का संकेत है. कोप्पल जिले की किष्किंधा पहाड़ियों में कैमरा ट्रैप में बाघ की गतिविधि कैद हुई. इन जंगलों में बाघ की मौजूदगी आखिरी बार 1970 के दशक में दर्ज की गई थी.
विशेषज्ञों का मानना है कि बाघ ने पिछले कई महीनों से किष्किंधा पहाड़ियों को अपना घर बना रखा होगा और हो सकता है कि वह आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम वन्यजीव कॉरिडोर से आया हो. लोगों को सलाह दी गई है कि वे अकेले उस इलाके में न जाएं और रात में अपने घरों के बाहर सोने से बचें.
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एससीएच/एबीएम