कर्नाटक: अंबेडकर विकास निगम में 14.95 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप, भाजपा ने सरकार को घेरा

Bengaluru, 16 अक्टूबर . कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता आर. अशोक ने Friday को राज्य की कांग्रेस Government पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर विकास निगम (एडीसीएल) में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए निर्धारित 14.95 करोड़ रुपये की राशि फर्जी बैंक खातों, जाली दस्तावेजों और समय से पहले सावधि जमा (एफडी) बंद कराकर कथित तौर पर हड़प ली गई.
एक बयान में अशोक ने महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित घोटाले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि ताजा मामला कर्नाटक Government के तहत वित्तीय धोखाधड़ी की एक और घटना को उजागर करता है.
Enforcement Directorate (ईडी) की 14 अक्टूबर की प्रेस विज्ञप्ति का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि अंबेडकर विकास निगम की राशि को फर्जी लेनदेन के जरिए दूसरी जगह भेजा गया. Lok Sabha में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाते हुए अशोक ने पूछा कि क्या इस तरह की कथित वित्तीय अनियमितताएं उनके ‘न्याय’ के विचार के अनुरूप हैं.
अशोक ने आरोप लगाया, “राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक न्याय की बात करते हैं, जबकि कर्नाटक की कांग्रेस Government पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए निर्धारित धन के कथित दुरुपयोग के आरोप लग रहे हैं.” उन्होंने कथित तौर पर सार्वजनिक धन और वंचित समुदायों के कल्याण के लिए निर्धारित राशि के गबन पर कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठाए. भाजपा नेता ने कहा कि उनकी पार्टी जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग जारी रखेगी और कथित घोटालों में शामिल लोगों को न्याय के कटघरे में लाने तक पीछे नहीं हटेगी.
ईडी के Bengaluru जोनल कार्यालय ने अंबेडकर विकास निगम के 14.95 करोड़ रुपये कथित तौर पर हड़पने के मामले में अयूब सैयद समेत पांच आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है. एजेंसी के अनुसार, इस धोखाधड़ी में जाली दस्तावेजों और दूसरे व्यक्ति के रूप में पहचान प्रस्तुत करने का इस्तेमाल किया गया. ईडी ने पांच अक्टूबर को Bengaluru की धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गठित विशेष अदालत में यह शिकायत दाखिल की थी. ईडी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, Bengaluru में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी. यह प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज की गई थी. एजेंसी के अनुसार, इन अपराधों को पीएमएलए, 2002 के तहत अनुसूचित अपराध माना गया है.
जांच में सामने आया कि जाली दस्तावेजों और पहचान संबंधी धोखाधड़ी के जरिए Bengaluru स्थित स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की एचएएल सेकंड स्टेज शाखा में अंबेडकर विकास निगम के नाम पर एक फर्जी चालू खाता खोला गया था. इसके बाद निगम की पांच-पांच करोड़ रुपये की चार सावधि जमाओं को कथित तौर पर जाली टर्म डिपॉजिट रसीद/फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (टीडीआर/एफडीआर) और फर्जी समयपूर्व निकासी पत्रों का इस्तेमाल कर समय से पहले बंद करा दिया गया. ईडी के अनुसार, इस प्रक्रिया के जरिए 14.95 करोड़ रुपये की राशि हड़पी गई, जिसे अपराध से अर्जित आय माना गया है.
आगे की जांच में पता चला कि कथित अपराध से अर्जित धन को कई व्यक्तियों और संस्थाओं के बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया. इसके बाद धन के मूल स्रोत को छिपाने के लिए रकम का हस्तांतरण और नकद निकासी की गई. एजेंसी के मुताबिक, पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए बयानों से भी संकेत मिला कि कथित धनशोधन प्रक्रिया के तहत धनराशि को जानबूझकर प्राप्त किया गया, स्थानांतरित किया गया और निकाला गया.
इससे पहले ईडी ने 25 मार्च 2026 को Bengaluru की विशेष अदालत में इस धनशोधन मामले में कथित रूप से शामिल 15 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की थी. एजेंसी ने आरोपियों की 6.02 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की थी. इसके अलावा, 22 जुलाई को ईडी ने दूसरा अस्थायी कुर्की आदेश जारी करते हुए एक आरोपी की 24 लाख रुपये मूल्य की अचल संपत्ति कुर्क की थी.
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डीएससी


