ओहियो से हारे विवेक रामास्वामी, एमी ने 20 साल बाद डेमोक्रेटिक पार्टी को दिलाई जीत

वाशिंगटन, 4 नवंबर . भारतीय मूल के रिपब्लिकन विवेक रामास्वामी ने ओहियो के गवर्नर चुनाव में डेमोक्रेट एमी एक्टन के सामने हार स्वीकार कर ली है. इसके साथ ही उनका वह हाई-प्रोफाइल चुनाव अभियान समाप्त हो गया, जिसे President डोनाल्ड ट्रंप और उपPresident जे.डी. वेंस का जोरदार समर्थन प्राप्त था.
यह हार रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक बड़ा चुनावी झटका है, खासकर उस राज्य के लिए जहां 2024 में ट्रंप ने आसानी से जीत हासिल की थी.
60 वर्षीय डॉक्टर और ओहियो की पूर्व स्वास्थ्य निदेशक, एक्टन Tuesday रात (स्थानीय समयानुसार), ओहियो की पहली महिला गवर्नर चुनी गईं. वह 2006 के बाद से इस पद पर जीतने वाली पहली डेमोक्रेट बन गई हैं.
चुनाव की रात आए नतीजों के अनुसार, एक्टन को लगभग 51 प्रतिशत वोट मिले, जबकि रामास्वामी को 46 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए. वहीं, लिबर्टेरियन उम्मीदवार डॉन किसिक को लगभग तीन प्रतिशत वोट मिले.
यह परिणाम डेमोक्रेट्स की ओर लगभग 16 प्रतिशत अंकों के झुकाव को दर्शाता है. इसकी तुलना में, 2024 के President चुनाव में ट्रंप ने ओहियो में 11 प्रतिशत अंकों के अंतर से जीत हासिल की थी.
ओहियो में चुनाव की रात अपने समर्थकों के बीच रामास्वामी ने अपनी हार स्वीकार की और बताया कि उन्होंने एक्टन को बधाई देने के लिए उनसे संपर्क किया है.
अपने संबोधन में, रामास्वामी ने समर्थकों का धन्यवाद किया और कहा कि वह सार्वजनिक जीवन से बाहर रहकर भी ओहियो की सेवा करना जारी रखेंगे.
उन्होंने अपने माता-पिता, पत्नी अपूर्वा, अपने तीन बच्चों और अपने साथी उम्मीदवार (रनिंग मेट), ओहियो सीनेट के अध्यक्ष रॉब मैकोली का भी आभार व्यक्त किया.
41 वर्षीय रामास्वामी, 2024 के President चुनाव के अपने असफल अभियान के दौरान एक प्रमुख राष्ट्रीय रिपब्लिकन चेहरे के रूप में उभरे थे. वह ओहियो के पहले भारतीय-अमेरिकी गवर्नर बनने की कोशिश कर रहे थे.
उनकी हार का असर ओहियो तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि ट्रंप और वेंस ने उनकी उम्मीदवारी में पूरी ताकत झोंक दी थी.
28 अक्टूबर को चिलिकोथे में एक रिपब्लिकन रैली को संबोधित करते हुए, ट्रंप ने कहा था: “अब से छह दिन बाद, ओहियो की जनता विवेक रामास्वामी को अपना गवर्नर चुनेगी.”
इसके बाद, 31 अक्टूबर को ट्रंप ने टेलीफोन के जरिए एक और चुनावी कार्यक्रम किया, जिसमें उन्होंने रिपब्लिकन मतदाताओं से रामास्वामी और पार्टी के अन्य उम्मीदवारों के समर्थन में वोट करने की अपील की.
ओहियो के पूर्व सीनेटर वेंस, चुनाव से ठीक पहले 2 नवंबर को स्वैंटन में आयोजित एक रैली के लिए अपने गृह राज्य लौटे.
वेंस ने समर्थकों से कहा, “मुझे पता है कि हम विवेक रामास्वामी और जॉन हस्टेड को चुनने जा रहे हैं.”
लेकिन नतीजे इन दोनों भविष्यवाणियों के विपरीत रहे. डेमोक्रेट शेरोड ब्राउन ने रिपब्लिकन सीनेटर जॉन हस्टेड को भी हरा दिया, जिससे ओहियो में रिपब्लिकन पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा.
चुनाव प्रचार के आखिरी हफ्तों में रामास्वामी का कैंपेन काफी तीखा हो गया था. ऐसा तब हुआ जब एक विज्ञापन में एक्टन की नाराज मां ने डेमोक्रेट उम्मीदवार पर बेईमानी का आरोप लगाया.
इस विज्ञापन की डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों ही पक्षों ने आलोचना की. इसमें निवर्तमान गवर्नर माइक डीवाइन भी शामिल थे. वहीं, ट्रंप ने इस विज्ञापन का इस्तेमाल करने के रामास्वामी के फैसले का बचाव किया.
रामास्वामी ने टैक्स कम करने, नियमों में ढील देने और Governmentी खर्च घटाने के मुद्दों पर प्रचार किया. वहीं, एक्टन ने किफायती जीवन, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कामकाजी परिवारों को राहत देने पर जोर दिया.
रिपब्लिकन उम्मीदवार ने इस चुनावी दौड़ में काफी पैसा भी लगाया; सितंबर के आखिर तक उन्होंने अपने कैंपेन में अपनी जेब से 36 मिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किए.
1985 में सिनसिनाटी में जन्मे रामास्वामी भारतीय प्रवासियों के बेटे हैं. उनके पूर्वज केरल के पलक्कड़ जिले के वडक्केनचेरी से ताल्लुक रखते हैं.
उनके पिता, वी.जी. रामास्वामी, ने अमेरिका जाने से पहले केरल में पढ़ाई की थी. अमेरिका में उन्होंने एक इंजीनियर के तौर पर काम किया.
उनकी मां, गीता रामास्वामी, एक मनोचिकित्सक (साइकियाट्रिस्ट) हैं. रामास्वामी ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और येल लॉ स्कूल से पढ़ाई की है. उन्होंने 2014 में बायोटेक्नोलॉजी कंपनी ‘रोइवांट साइंसेज’ की स्थापना की.
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केआर/


