एसटीपी घोटाला: सत्येंद्र जैन की जमानत को क्लीन चिट बताने पर आप पर बरसे दिल्ली भाजपा अध्यक्ष

New Delhi, 3 सितंबर . दिल्ली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ​​ने Thursday को कहा कि किसी भी आरोपी को जेल भेजना या जमानत देना न्यायिक प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा है. उन्होंने कहा कि यही बात आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन के मामले पर भी लागू होती है, जिन्हें हाल ही में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) घोटाले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत मिल गई.

मल्होत्रा ​​ने आगे कहा कि जमानत मिलने का मतलब यह नहीं है कि आरोपी बरी हो गया है.

उन्होंने जैन के मामले के संदर्भ में यह बात कही, जिनकी जमानत Thursday को उनके पार्टी सदस्यों ने जश्न के रूप में मनाई और इसे एक तरह से क्लीन चिट बताया.

उन्होंने आगे कहा कि जैन को मुकदमे का सामना करना पड़ेगा और जांच एजेंसी का कानूनी मामला इतना मजबूत है कि यह सुनिश्चित करेगा कि उन्हें और अन्य लोगों को निश्चित रूप से दोषी ठहराया जाएगा.

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि अपनी जांच पूरी करने के बाद, जांच एजेंसी ने जैन को गिरफ्तार किया और उन्हें अदालत के सामने पेश किया.

अदालत ने जैन को 18 और 19 अगस्त को जेल भेजा और Thursday को जमानत दे दी, क्योंकि मामला जमानती था.

मल्होत्रा ​​ने कहा कि आम आदमी पार्टी को यह समझना चाहिए कि जमानत मिलना ‘सत्यमेव जयते’ का मामला नहीं है.

इससे पहले, दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने Wednesday को आम आदमी पार्टी के दिल्ली संयोजक सौरभ भारद्वाज द्वारा एक स्कूल के बाहर स्कूली बच्चों के बीच किए गए Political प्रचार की निंदा की.

उन्होंने कहा कि भारद्वाज ने छोटे स्कूली बच्चों को केक का लालच देकर और उन्हें Political वीडियो में शामिल करके गैरकानूनी काम किया है.

दिल्ली भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भारद्वाज खुद शिक्षा मंत्री रह चुके हैं और शायद उन्हें बेहतर पता है कि दिल्ली शिक्षा अधिनियम के तहत स्कूली बच्चों को इस तरह Political वीडियो में दिखाना प्रतिबंधित है.

कपूर ने कहा कि अगर भारद्वाज और आम आदमी पार्टी को लगता है कि दिल्ली विद्या वाहिनी योजना के तहत साइकिल वितरण में कोई भ्रष्टाचार हुआ है, तो वे Police में शिकायत दर्ज करा सकते हैं या अदालत का रुख कर सकते हैं. हालांकि, उन्हें (आप को) स्कूली बच्चों के बीच Political प्रचार करने का कोई अधिकार नहीं है.

एमएस/

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