
नागोया, 1 अक्टूबर . एशियन गेम्स 2026 में Thursday को India के नितेश सिवाच ने ग्रीको-रोमन कुश्ती में सिल्वर मेडल हासिल किया. नितेश को नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में पुरुषों के 97 किलोग्राम फाइनल में जापान के यूरी नकाजातो के हाथों 0-4 से हार का सामना करना पड़ा.
देश को सिल्वर मेडल जिताने के बाद भारतीय पहलवान नितेश सिवाच ने कहा कि एशियन गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतना एक ऐसा पल था, जिसके लिए उन्होंने अपने पूरे सफर में मेहनत की थी. इस महाद्वीपीय प्रतियोगिता में ग्रीको-रोमन रेसलिंग के फाइनल में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय बनने के बाद नितेश ने यह उपलब्धि अपने पिता को समर्पित की. उनके इस मेडल ने India के 64 साल लंबे इंतजार को खत्म कर दिया है. उनसे पहले साल 1962 में मारुति माने ने इसी वेट कैटेगरी में देश के लिए सिल्वर मेडल जीता था.
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद नितेश ने कहा, “सच कहूं तो मुझे अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है. मैंने एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीता है. मेरे पिता हमेशा मुझसे कहते थे कि एक बार जब मैंने यह सफर शुरू कर दिया है तो पीछे मुड़कर नहीं देखना है, मुझे घर मेडल लाना ही है, और आज, मैंने उनके लिए यह कर दिखाया.”
नितेश नॉकआउट स्टेज में दो शानदार प्रदर्शन करने के बाद फाइनल में पहुंचे थे. उन्होंने क्वार्टर फाइनल में तुर्कमेनिस्तान के अमनबेर्डी अगामामेदोव को 7-1 से हराया और फिर सेमीफाइनल में मंगोलिया के गनबातारिन गनखुयाग को 9-0 से मात दी.
नितेश ने बताया कि अपनी वेट कैटेगरी में नई उपलब्धि हासिल करने के दबाव ने उनके संकल्प को और मजबूत किया. उन्होंने कहा, “मेरी वेट कैटेगरी से यहां पहले किसी ने मेडल नहीं जीता था, इसलिए बहुत दबाव था, लेकिन मुझे अपनी ट्रेनिंग पर भरोसा था और मैंने अपना सब कुछ झोंक दिया.”
फाइनल मुकाबला अधिक कठिन साबित हुआ, जिसमें नकाजातो ने 2-0 की बढ़त बना ली, क्योंकि नितेश को पैसिविटी के लिए पेनाल्टी दी गई थी. जापानी रेसलर ने दूसरे राउंड में अपनी बढ़त को 4-0 कर लिया और गोल्ड जीतने के लिए अपनी पकड़ बनाए रखी.
एशियन चैंपियनशिप 2026 के सिल्वर मेडलिस्ट नितेश ने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद यह मेडल बहुत खास है. उन्होंने कहा, “मैंने अपने देश का तिरंगा लहरा दिया.”
यह सिल्वर मेडल भारतीय ग्रीको-रोमन रेसलिंग के लिए भी एक बड़ी कामयाबी है, क्योंकि नितेश इस कैटेगरी में एशियन गेम्स के फाइनल में पहुंचने वाले इतिहास के दूसरे भारतीय बन गए हैं.
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