
New Delhi, 29 अगस्त . केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाली एक उच्चस्तरीय कमेमोरेटिव (स्मृति) बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे. विदेश मंत्रालय (एमईए) ने Saturday को बताया कि यह बैठक गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) शिखर सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित की जा रही है.
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक एनएएम के पहले राष्ट्राध्यक्ष/Government प्रमुखों के सम्मेलन की 65वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है.
बैठक की थीम ‘द लिगेसी ऑफ नॉन अलाइनमेंट: लेसंस फॉर टुडेस वर्ल्ड’ यानी ‘गुटनिरपेक्षता की विरासत: आज की दुनिया के लिए सबक’ रखी गई है.
विदेश मंत्रालय ने कहा, “India इस आंदोलन का संस्थापक सदस्य है. एनएएम, ऐतिहासिक महत्व के इस मंच पर 121 विकासशील देशों को एक साथ लाता है और India आंदोलन के सिद्धांतों एवं मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है.”
एनएएम की शुरुआत 1955 में इंडोनेशिया के बांडुंग में आयोजित एशियाई-अफ्रीकी सम्मेलन से मानी जाती है. इस सम्मेलन में एशिया और अफ्रीका के देशों ने संप्रभुता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और उपनिवेशवाद के विरोध जैसे सिद्धांतों को आगे बढ़ाया था.
इसके छह वर्ष बाद 1961 में बेलग्रेड में आयोजित पहले शिखर सम्मेलन में गुटनिरपेक्ष आंदोलन औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया. आज भी एनएएम बहुपक्षवाद और विकासशील देशों के हितों, विशेषकर संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में उनकी आवाज को मजबूत करने की दिशा में काम करता है.
इससे पहले अक्टूबर 2025 में युगांडा की राजधानी कंपाला में आयोजित 19वीं एनएएम मध्यावधि मंत्रिस्तरीय बैठक में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सीमा पार आतंकवाद के साझा खतरे से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया था.
सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा था कि आतंकवाद एक साझा खतरा है, जिसका मुकाबला केवल व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए किया जा सकता है. उन्होंने कहा था कि India दशकों से सीमा पार आतंकवादी हमलों का शिकार रहा है और 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों की हत्या इसका ताजा उदाहरण है.
उन्होंने कहा था कि जब कोई देश आतंकवाद को अपनी राज्य नीति बना ले, आतंकवादी ठिकानों को बिना किसी दंड के फलने-फूलने दिया जाए और किसी राज्य के अधिकारी आतंकवादियों का महिमामंडन करें, तो ऐसे कृत्यों की स्पष्ट और बिना किसी शर्त निंदा होनी चाहिए.
सिंह ने कहा था कि एनएएम के लगभग सभी सदस्य देश आतंकवाद की चुनौती से परिचित हैं और इसके खिलाफ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
Pakistan का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा था कि यह गहरी चिंता का विषय है कि जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पहलगाम आतंकी हमले पर विचार किया, तब एक सदस्य देश ने कथित तौर पर हमले के जिम्मेदार संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ का बचाव किया और उसके सार्वजनिक उल्लेख को हटाने की मांग तक की.
उन्होंने कहा था कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन को आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ का रुख अपनाना चाहिए. आतंकवाद को प्रायोजित करने, समर्थन देने, उसका औचित्य साबित करने या उसे छिपाने की किसी भी कोशिश का अंततः खामियाजा भुगतना पड़ेगा.
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केआर/