एथेनॉल नहीं; जमाखोरी और बाजार की धारणा हैं चीनी महंगाई की वजह; जल्द मिलेगी राहत: डॉ. बख्शी राम

New Delhi, 24 अगस्त . देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर चल रही बहस के बीच कृषि वैज्ञानिक और आईसीएआर-शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट, कोयंबटूर के पूर्व निदेशक पद्मश्री डॉ. बख्शी राम ने Monday को कहा कि मौजूदा मूल्य वृद्धि को एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं है. न्यूज एजेंसी से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में चीनी का उत्पादन घरेलू खपत से अधिक है और पर्याप्त बफर स्टॉक भी उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि बाजार में बनी धारणा, जमाखोरी और आपूर्ति को लेकर पैदा की गई आशंकाएं कीमतों में हालिया तेजी के प्रमुख कारण हैं.

डॉ. बख्शी राम ने से बात करते हुए कहा कि देश में एथेनॉल उत्पादन Government की निगरानी में होता है और यह पूरी तरह चीनी उपलब्धता तथा स्टॉक की स्थिति को ध्यान में रखकर तय किया जाता है. Government समय-समय पर यह निर्णय लेती है कि एथेनॉल के लिए बी-हैवी शीरा, सी-शीरा या सिरप का कितना उपयोग किया जाएगा. उन्होंने कहा कि एथेनॉल कार्यक्रम से चीनी मिलों को वित्तीय मजबूती मिली है और किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर मिलने लगा है. इसलिए चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के लिए एथेनॉल को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा.

उन्होंने कहा, “पिछले सीजन में देश में लगभग 30 से 31 मिलियन टन चीनी का उत्पादन हुआ, जबकि घरेलू खपत करीब 27 से 28 मिलियन टन के आसपास रहती है. इसके अलावा हर वर्ष देश में 60 से 70 लाख टन तक का बफर स्टॉक भी मौजूद रहता है. ऐसे में चीनी की वास्तविक कमी जैसी कोई स्थिति नहीं है.”

चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की सलाह पर डॉ. बख्शी राम ने कहा कि इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी, हालांकि इसका असर शुगर रिकवरी पर पड़ सकता है. उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर दिवाली के बाद पेराई शुरू होने पर गन्ने में चीनी की मात्रा अधिक होती है और रिकवरी बेहतर मिलती है.

उन्होंने कहा, “यदि मिलें 15 अक्टूबर या उससे पहले पेराई शुरू करती हैं तो बाजार में नई चीनी जल्दी उपलब्ध होगी, जिससे आपूर्ति बढ़ेगी और जमाखोरी की प्रवृत्ति पर भी असर पड़ सकता है. इससे कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना है.”

डॉ. बख्शी राम ने आगे बताया कि कुछ वर्ष पहले देश में चीनी का उत्पादन जरूरत से काफी अधिक हो गया था, जिसके कारण बाजार में कीमतें गिर गई थीं. उस समय कई चीनी मिलें किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर नहीं कर पा रही थीं.

उन्होंने कहा कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम और Government की प्रोत्साहनकारी नीतियों ने इस स्थिति को बदल दिया. अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल उत्पादन में उपयोग किए जाने से मिलों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिला और उनकी वित्तीय स्थिति बेहतर हुई. इसका सीधा लाभ किसानों को मिला क्योंकि उनके बकाया भुगतान समय पर होने लगे.

उन्होंने कहा, “आज चीनी मिलें पहले की तुलना में कहीं अधिक वित्तीय रूप से मजबूत हैं और इसका सबसे बड़ा कारण एथेनॉल नीति है.”

Government द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात और व्यापारियों पर 400 टन स्टॉक सीमा लगाने के फैसले का स्वागत करते हुए डॉ. बख्शी राम ने कहा कि इससे बाजार को स्पष्ट संदेश जाएगा कि Government कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय है.

उन्होंने कहा, “जब व्यापारियों और जमाखोरों को यह संकेत मिलेगा कि जरूरत पड़ने पर Government आयात की मात्रा और बढ़ा सकती है, तो कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशें कमजोर पड़ेंगी. इससे जमाखोरी पर अंकुश लगेगा और बाजार में आपूर्ति को लेकर बना दबाव कम होगा.”

उन्होंने बताया कि यदि कीमतों में असामान्य वृद्धि जारी रहती है तो Government आयात की मात्रा बढ़ाने जैसे अतिरिक्त कदम भी उठा सकती है. इससे बाजार में संतुलन बहाल करने में मदद मिलेगी.

डॉ. बख्शी राम ने विश्वास जताया कि Government की सक्रिय निगरानी व्यवस्था से चीनी की उपलब्धता और कीमतों दोनों में स्थिरता आएगी. उन्होंने बताया कि हाल ही में विभिन्न Governmentी एजेंसियों की टीमों को चीनी मिलों और गोदामों का निरीक्षण करने के लिए लगाया गया है.

उन्होंने कहा कि अधिकारी स्वयं गोदामों में जाकर उपलब्ध स्टॉक की जांच कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बाजार में कृत्रिम कमी न बनाई जाए. इससे न केवल जमाखोरी पर रोक लगेगी बल्कि उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ेगा.

डीबीपी

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