एआई बूम ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बांटा; कुछ देशों को बड़ा फायदा, कई अर्थव्यवस्थाओं पर बढ़ा दबाव: आईएमएफ

वॉशिंगटन, 13 अक्टूबर . अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने Tuesday को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में तेजी से बढ़ रहे निवेश और मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण दुनिया की अर्थव्यवस्था दो हिस्सों में बंटती नजर आ रही है. एक ओर चिप निर्माण और एआई सप्लाई चेन से जुड़े देश तेजी से लाभ उठा रहे हैं, जबकि दूसरी ओर ऊर्जा आयात पर निर्भर और तकनीकी मूल्य शृंखला से बाहर रहने वाले देशों पर दबाव बढ़ रहा है.

आईएमएफ की अक्टूबर 2026 वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक (डब्ल्यूईओ) रिपोर्ट के अनुसार, भू-Political घटनाक्रम और तकनीकी बदलावों के संयुक्त प्रभाव ने एक “विभाजित वैश्विक अर्थव्यवस्था” की स्थिति पैदा कर दी है. जिन देशों को बेहतर व्यापारिक शर्तें, तकनीक-आधारित निर्यात और निवेश का लाभ मिल रहा है, उन्हें सुरक्षा कवच मिला है, जबकि अन्य देशों को ऊंचे आयात बिल और कमजोर मांग का सामना करना पड़ रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभरा है. आईएमएफ ने 2026 में उसकी आर्थिक वृद्धि दर 10.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो 2025 में 8.8 प्रतिशत थी. हालांकि 2027 में इसके 4.3 प्रतिशत तक धीमा पड़ने की संभावना है.

दक्षिण कोरिया की वृद्धि दर भी 2025 के 1.1 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 3.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है. आईएमएफ के अनुसार, सेमीकंडक्टर की वैश्विक मांग में तेजी ने मध्य पूर्व युद्ध के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया है.

रिपोर्ट में वियतनाम के लिए 8.4 प्रतिशत और मलेशिया के लिए 5.2 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है. आईएमएफ ने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया की कई अर्थव्यवस्थाएं डेटा सेंटर गतिविधियों और वैश्विक टेक्नोलॉजी चक्र में तेजी से लाभान्वित हो रही हैं.

हालांकि आईएमएफ ने यह भी कहा कि एआई से मिलने वाला लाभ बहुत सीमित देशों तक केंद्रित है. रिपोर्ट के अनुसार, उन्नत सेमीकंडक्टर के वैश्विक व्यापार का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा ताइवान और कोरिया से आता है.

मांग के मोर्चे पर चीन और अमेरिका एआई से जुड़े कंप्यूटिंग हार्डवेयर के कुल शुद्ध आयात का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखते हैं. साथ ही 2024 के बाद स्थापित नए डेटा सेंटर्स में उनकी हिस्सेदारी 57 प्रतिशत रही है.

आईएमएफ का कहना है कि एआई से जुड़ा हार्डवेयर व्यापार विश्व जीडीपी के अनुपात में तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसका लाभ सभी देशों को समान रूप से नहीं मिलेगा.

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जो देश ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं और तकनीकी मूल्य शृंखला से जुड़े नहीं हैं, वे सबसे अधिक दबाव में रहेंगे. उन्हें ऊंची आयात लागत, मुद्रा पर दबाव, वास्तविक आय में कमी और सीमित वित्तीय संसाधनों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

आईएमएफ ने कहा कि कम आय वाले और संवेदनशील देशों का बड़ा हिस्सा इसी श्रेणी में आता है, जिससे देशों के बीच और देशों के भीतर आय असमानता बढ़ने का खतरा है.

हालांकि रिपोर्ट में India को एक अपवाद बताया गया है. आईएमएफ के अनुसार, India की वृद्धि चिप निर्यात पर नहीं बल्कि मजबूत घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती पर आधारित है. इसी कारण ऊर्जा आयातक उभरती अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में आने के बावजूद India को मध्यम अवधि के नकारात्मक संशोधनों से अलग रखा गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भविष्य की वृद्धि काफी हद तक एआई को अपनाने की क्षमता और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दक्षता पर निर्भर करेगी. जो देश ऊर्जा उत्पादन के लिए जीवाश्म ईंधन पर अधिक निर्भर हैं, वे भू-Political झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील रहेंगे.

आईएमएफ ने एआई से उत्पादकता में संभावित वृद्धि को लेकर भी सतर्क रुख अपनाया है. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ विशेष कार्यों में बड़े लाभ दिखाई दे रहे हैं, लेकिन पूरी अर्थव्यवस्था के स्तर पर अभी ऐसे प्रभाव सीमित नजर आए हैं.

रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि यदि एआई से जुड़ी लाभप्रदता और उत्पादकता को लेकर उम्मीदें जरूरत से ज्यादा आशावादी साबित होती हैं, तो एआई अवसंरचना और तकनीक में निवेश की गति अचानक धीमी पड़ सकती है.

आईएमएफ के अनुसार, एआई कंपनियों की अधिक हिस्सेदारी वाले शेयर बाजारों में पुनर्मूल्यांकन का जोखिम भी बना हुआ है. हाल के महीनों में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के तकनीकी शेयरों में देखी गई अस्थिरता इसी जोखिम की ओर संकेत करती है.

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डीबीपी

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