
New Delhi, 3 सितंबर इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता के बीच उनकी सबसे बड़ी चुनौती बैटरी की उम्र है. अब बैटरी की उम्र बढ़ाने की दिशा में भारतीय शोधकर्ताओं ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी राउरकेला के शोधकर्ताओं ने ऐसी हाइब्रिड ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की है, जो अचानक ब्रेक लगाने, तेज गति से वाहन चलाने और गति कम-ज्यादा करने के दौरान बैटरी पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम कर सकती है.
इस तकनीक का पेटेंट भी हासिल कर लिया गया है. इस शोध को उच्च शिक्षण संस्थान एनआईटी राउरकेला की प्रो. मोनालिसा Patnaयक, डॉ. प्रद्युम्न कुमार बेहरा और करण गुप्ता ने अंजाम दिया है. शोधकर्ताओं के मुताबिक नई प्रणाली का डिजाइन कम से कम घटकों पर आधारित है. इससे सिस्टम की जटिलता कम होती है और बैटरी को अचानक बढ़ने वाली बिजली की मांग से सुरक्षा मिलती है. दरअसल शहरों में इलेक्ट्रिक वाहनों को बार-बार रुकना और चलना पड़ता है.
इसके अलावा अचानक एक्सीलरेशन, डिसेलरेशन और ब्रेक लगाने जैसी स्थितियों में बैटरी से बहुत तेजी से करंट लिया या वापस भेजा जाता है. इससे बैटरी सेल्स पर थर्मल और विद्युत दबाव बढ़ता है और समय के साथ उनकी क्षमता तथा उम्र प्रभावित हो सकती है. इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए शोधकर्ताओं ने बैटरी के साथ सुपरकैपेसिटर को जोड़ा है. सुपरकैपेसिटर बहुत तेजी से चार्ज और डिस्चार्ज हो सकता है और अचानक पैदा होने वाली बिजली की मांग को संभाल सकता है. इससे बैटरी को तेज करंट के झटकों से राहत मिलती है और उसकी उम्र बढ़ाने में मदद मिलती है.
नई प्रणाली की खासियत इसका सरल डिजाइन है. प्रो. मोनालिसा Patnaयक के मुताबिक इसमें तीन प्रमुख घटक हैं. एक घटक कन्वर्टर, एक इंडक्टर और एक सिंगल कंट्रोल सिस्टम है. एक ही कन्वर्टर बैटरी और सुपरकैपेसिटर दोनों को वाहन की विद्युत प्रणाली से जोड़ता है. इससे अतिरिक्त स्विच और नियंत्रण उपकरणों की जरूरत कम हो जाती है. वहीं इंडक्टर करंट में अचानक होने वाले उछाल को नियंत्रित करता है. सिंगल कंट्रोल सिस्टम वाहन के तेज गति पकड़ने और गति कम करने, दोनों परिस्थितियों में बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करता है.
शोधकर्ताओं ने अचानक ब्रेक लगाने, तेज तेज और मंद गति जैसी परिस्थितियों में इस प्रणाली का परीक्षण किया. परीक्षण के दौरान सिस्टम ने 48 वोल्ट का स्थिर वोल्टेज बनाए रखा और बैटरी करंट में अचानक बदलाव को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की. सुपरकैपेसिटर ने भी अचानक पैदा होने वाली बिजली की जरूरत को प्रभावी ढंग से संभाला. प्रो. Patnaयक के अनुसार यह प्रणाली 24 से 60 वोल्ट डीसी वाले कम-वोल्टेज इलेक्ट्रिक वाहन प्लेटफॉर्म के लिए विशेष रूप से उपयोगी है. इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक स्कूटर, इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल, ई-रिक्शा, कार्गो ट्राइसाइकिल और कैंपस या औद्योगिक उपयोगिता वाहनों में किया जा सकता है.
इसके अलावा तकनीक का इस्तेमाल स्वचालित निर्देशित वाहनों, वेयरहाउस कार्ट, डीसी माइक्रोग्रिड और नवीकरणीय ऊर्जा चार्जिंग स्टेशनों में भी किया जा सकता है. संस्थान के मुताबिक पेटेंट मिलने के बाद यह तकनीक अब ईवी निर्माताओं, पावरट्रेन सिस्टम इंटीग्रेटर्स, फ्लीट ऑपरेटरों और ईवी रेट्रोफिट स्टार्ट-अप्स के साथ सहयोग के लिए तैयार है.
India में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है. ऐसे में बैटरी की उम्र बढ़ाने वाली यह तकनीक न केवल वाहनों की विश्वसनीयता बढ़ा सकती है, बल्कि लंबे समय में बैटरी बदलने की लागत को कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक टिकाऊ बनाने में भी मददगार साबित हो सकती है.
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जीसीबी/पीएम