आपराधिक मामले में बरी होने के बावजूद महिला को डिटेंशन सेंटर में रखने और दुष्कर्म की शिकायत पर हाई कोर्ट सख्त, गृह सचिव तलब

रांची, 1 अक्टूबर . आपराधिक मामले में बरी किए जाने के बाद भी एक महिला को हजारीबाग के डिटेंशन सेंटर में रखे जाने और उसके साथ कथित दुष्कर्म के आरोपों पर Jharkhand हाईकोर्ट ने राज्य Government से जवाब मांगा है. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह सचिव को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है.

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अखिल कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्व विवेक की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया. याचिका में एक महिला को डिटेंशन सेंटर में रखे जाने को चुनौती दी गई है. महिला की ओर से अधिवक्ता उज्जैनी चटर्जी ने अदालत को बताया कि महिला को एक आपराधिक मामले में अदालत ने बरी कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उसे हजारीबाग डिटेंशन सेंटर में रखा गया.

याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच डिटेंशन सेंटर में तैनात Police constable रंजीत महतो ने महिला के साथ लगातार यौन शोषण और दुष्कर्म किया. सुनवाई के दौरान अदालत ने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति को आपराधिक मामले में बरी कर दिया गया है, तो उसे किस कानूनी आधार पर हिरासत में रखा जा सकता है.

अदालत ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार देता है और कानून के वैध प्राधिकार के बिना किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती. मामले में अदालत ने Jharkhand राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), हजारीबाग की टीम को महिला से बातचीत कर उसका बयान दर्ज करने का निर्देश दिया है.

अदालत ने टीम को अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा है. सुनवाई के दौरान हजारीबाग के Police अधीक्षक भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत से जुड़े. उन्होंने आरोपी Police constable के खिलाफ जांच और महिला की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा दिया.

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को तय की है. उस दिन गृह सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ डीएलएसए और हजारीबाग एसपी की रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष पेश की जाएगी.

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एसएनसी/एएमटी

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