आदिवासी कल्याण घोटाला: कर्नाटक सीएम का बड़ा बयान, बोले- बेगुनाह को देना पड़ा इस्तीफा

Bengaluru, 21 सितंबर . आदिवासी कल्याण घोटाले के सिलसिले में कांग्रेस विधायक बी. नागेंद्र के कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफे का जिक्र करते हुए कर्नाटक के Chief Minister डीके शिवकुमार ने Monday को कहा कि विपक्ष के दबाव के कारण Government को एक ‘बेगुनाह’ व्यक्ति से इस्तीफा लेने के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्होंने भाजपा विधायकों की आलोचना करते हुए कहा कि वे अपने उठाए गए मुद्दों पर चर्चा होने देने के बजाय विधानसभा की कार्यवाही में बाधा डाल रहे थे.

उन्होंने यह बयान कर्नाटक विधानसभा में सूखा-स्थिति और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने के फैसले का बचाव करते हुए दिया.

विपक्ष के नेता आर. अशोक ने जोर देकर कहा कि इन मामलों पर उस ‘स्थगन प्रस्ताव’ के तहत चर्चा होनी चाहिए जिसे उन्होंने स्पीकर को सौंपा था.

नागेंद्र के इस्तीफे का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने विधानसभा में कहा कि हमने विपक्ष के दबाव में एक बेगुनाह व्यक्ति को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया. मैंने ही उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया. मैंने विपक्ष से पूछा कि वे उनके इस्तीफे की मांग क्यों कर रहे हैं. वे कुछ नहीं बोले और सदन की कार्यवाही में बाधा डाली. बाद में, उन्होंने विरोध मार्च भी निकाला. उन्हें करने दीजिए, लोकतंत्र में इसकी इजाजत है.

शिवकुमार ने कहा कि ‘काम रोको प्रस्ताव’ की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि Government ने उन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले ही विशेष सत्र बुला लिया था.

अशोका ने Government से उस प्रावधान के बारे में सवाल किया जिसके तहत विशेष सत्र बुलाया गया था और कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

Bengaluru विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौडा ने कहा कि विपक्ष ने ‘काम रोको प्रस्ताव’ अभी पेश किया है, जबकि Government ने उन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले ही विशेष सत्र बुला लिया था.

शिवकुमार ने कहा कि विपक्ष ने पिछले मॉनसून सत्र में बाधा डाली थी और उन्हें एक मिनट भी बोलने नहीं दिया था. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए लिखित अनुरोध किया था, लेकिन बाद में कार्यवाही में बाधा डाली, जिससे Government को सत्र दो दिन कम करना पड़ा.

उन्होंने कहा कि अब, मैंने एक विशेष सत्र बुलाया है. उससे पहले, मैंने सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के संबंध में विभिन्न जिलों का दौरा किया है. कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर हमारा रुख 27 सितंबर तक केंद्र को बताना है. इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, विशेष सत्र बुलाया गया है.

शिवकुमार ने कहा कि वह पिछली रिपोर्ट सीधे केंद्र को भेज सकते थे, लेकिन वह चाहते थे कि इन मुद्दों पर चुने हुए प्रतिनिधि चर्चा करें, न कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय बने.

उन्होंने कहा कि इस सत्र में सूखे और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर चर्चा होनी चाहिए. यह सत्र लोगों की इच्छा के अनुसार बुलाया गया है.

उन्होंने बताया कि इन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए राज्य के चार डिवीजनों (कलबुर्गी, बेलगावी और चित्रदुर्ग शामिल) में विधायकों के साथ बैठकें की गई थीं.

शिवकुमार ने कहा कि 120 तालुकों को पहले ही सूखा-प्रभावित घोषित किया जा चुका है, जबकि अन्य 100 तालुकों को इसमें शामिल करने के लिए उनकी जांच की जा रही है.

उन्होंने यह भी कहा कि विधायकों ने उन्हें किसानों पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के असर के बारे में बताया है और इसके संभावित नतीजों को गंभीर बताया.

उन्होंने कहा कि सांसदों, विधायकों और एमएलसी को बुलाया गया था और बैठकें की गई थीं.

एमएस/

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