आजम खान के परिवार के साथ भेदभाव, सत्ता बदलने पर सामने आएगी सच्चाई: रमाशंकर राजभर

New Delhi, 29 अक्टूबर . Samajwadi Party के सांसद रमाशंकर राजभर ने उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों के लिए चरित्र प्रमाण पत्र संबंधी कड़े नियमों, एक नवंबर की रैली के लिए ट्रेनों पर कथित पाबंदियों, आजम खान व उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को जमानत मिलने और एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर Government पर निशाना साधा. उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की मॉक पार्लियामेंट में शामिल होने की बात भी कही. साथ ही, आरोप लगाया कि Government विरोध की आवाज सुनने को तैयार नहीं है और विपक्ष के आंदोलनों को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं.
उत्तर प्रदेश में प्रदर्शनकारियों के लिए चरित्र प्रमाण पत्र के कड़े नियमों को लेकर रमाशंकर राजभर ने कहा कि सत्ता का रवैया तानाशाहीपूर्ण हो गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि नौकरी और प्रदर्शन के बीच क्या संबंध है? यदि किसी कर्मचारी के साथ अन्याय होता है, तो क्या वह विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकता? प्रदर्शन में शामिल होने के कारण किसी व्यक्ति को नौकरी के अधिकार से वंचित करना उचित नहीं है. सांसद ने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए आरोप लगाया कि Government नौकरी देने के बजाय बेरोजगार युवाओं के आंदोलन करने के अधिकार को भी छीनना चाहती है. दिल्ली में 12 वर्षों और उत्तर प्रदेश में भी 12 वर्षों के दौरान जब-जब जनता सड़कों पर उतरी है, तब-तब Governmentों ने विरोध के प्रति कठोर रवैया अपनाया है. इस तरह का रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता है. युवाओं को अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाने का अधिकार मिलना चाहिए.
एक नवंबर की रैली के लिए ट्रेनों पर कथित पाबंदियां लगाए जाने को लेकर केसी वेणुगोपाल के आरोपों पर राजभर ने कहा कि Government विपक्ष के आंदोलन से घबराई हुई है. इंडिया गठबंधन के मार्च की जानकारी मिलने के बाद Government ने पहले ही मार्च निकाल दिया. Government लोगों को अपनी बात रखने के लिए दिल्ली आने से रोकने की कोशिश कर सकती है. बस, मेट्रो और रेलवे जैसी परिवहन व्यवस्थाओं में व्यवधान डालने के बावजूद Government के खिलाफ लोगों का आक्रोश कम नहीं होगा. वोट चोरी और चंदा चोरी के आरोपों को लेकर होने वाले आंदोलन सफल होंगे.
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को जमानत मिलने पर सपा सांसद ने कहा कि आजम खान के परिवार के साथ Government ने भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में तुष्टीकरण की राजनीति के तहत मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, ताकि हिंदू समुदाय को एकजुट किया जा सके. राजभर ने कहा कि सत्ता बदलने के बाद आजम खान के खिलाफ लगाए गए मामलों की सच्चाई सामने आएगी. आजम खान पर दबाव और साजिश के तहत आरोप लगाए गए हैं और न्यायालय में इन मामलों का समाधान होगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालत इन आरोपों पर उचित फैसला करेगी.
एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर Prime Minister Narendra Modi के एक्स पोस्ट पर राजभर ने सवाल किया कि Prime Minister को अपनी सीट के बारे में भी पोस्ट करना चाहिए था. उन्होंने Samajwadi Party की चुनावी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अयोध्या और Lucknow का जिक्र किया. साथ ही काशी, मथुरा और प्रयागराज को लेकर भी Political टिप्पणी की. राजभर ने धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि चंदा चोरी करने वाले लोग वास्तविक सनातनी नहीं हो सकते. उन्होंने भगवान श्रीराम, भगवान शिव और भगवान कृष्ण का उल्लेख करते हुए Samajwadi Party को सनातनी मूल्यों से जोड़ने का दावा किया.
एमएलसी चुनाव के परिणामों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणी के संदर्भ में राजभर ने कहा कि यदि बैलेट बॉक्स नहीं होता, तो Samajwadi Party सभी सीटें जीत सकती थी. ईवीएम से चुनाव होने पर भाजपा को फायदा मिलता, जबकि बैलेट पेपर से Samajwadi Party को जीत मिली. उन्होंने मतदाता सूची तैयार करने और मतगणना के दौरान अनियमितताओं के आरोप भी लगाए. यदि ऐसी कथित बेईमानी नहीं होती, तो सपा सभी सीटें जीत सकती थी.
एमएलसी चुनाव में वाराणसी के परिणाम और अखिलेश यादव की टिप्पणी पर राजभर ने कहा कि दिल्ली और Lucknow की Governmentों के बीच टकराव की स्थिति है. उन्होंने दोनों Governmentों की तुलना दो इंजनों से करते हुए कहा कि दोनों के बीच संघर्ष चल रहा है. सपा सांसद ने दावा किया कि 2027 में उत्तर प्रदेश में Samajwadi Party की Government बनने जा रही है.
मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर मॉक पार्लियामेंट के आयोजन पर राजभर ने कहा कि Samajwadi Party के नेता इसमें शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि जब निर्वाचित सदन में जनता के मुद्दों को नहीं सुना जाता, तब मॉक संसद के माध्यम से देश के हालात पर चर्चा की जाएगी. इस आयोजन में विपक्षी नेता मौजूदा परिस्थितियों और जनता से जुड़े सवालों को उठाएंगे.
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पीएसके


