आईसीडब्ल्यूए की सिल्वर जुबली पर जयशंकर बोले-भारत अब वैश्विक चुनौतियों पर आत्मविश्वास से रख रहा विचार

नई द‍िल्‍ली, 15 सितंबर . नई द‍िल्‍ली के मंडी हाउस स्‍थित विवेक ऑडिटोरियम में Tuesday को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के तौर पर ‘इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स’ की सिल्वर जुबली (25वीं वर्षगांठ) का जश्न मनाया गया. इस अवसर पर मुख्‍य अत‍िथि के तौर पर उपPresident सीपी राधाकृष्णन, व‍िदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री मौजूद रहे.

इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स की सिल्वर जुबली कार्यक्रम को संबोध‍ित करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि आज यहां उपस्थित होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है क्योंकि हम इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (आईसीडब्ल्यूए) को राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा मिलने के 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं.

इस दौरान जयशंकर ने आईसीडब्ल्यूए के अध्यक्ष के रूप में समारोह में उपस्‍थित होने के ल‍िए उपPresident सीपी राधाकृष्णन का आभार व्‍यक्‍त क‍िया.

उन्‍होंने कहा क‍ि 1943 में अपनी स्थापना के बाद से आईसीडब्ल्यूए अंतरराष्ट्रीय मामलों के अध्ययन और उनके प्रचार-प्रसार के लिए लगातार काम करता रहा है. वर्ष 2001 में संसद ने इसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था का दर्जा दिया, जो दुनिया से जुड़े मुद्दों पर India की बौद्धिक भागीदारी में इसके विशेष योगदान की पहचान थी.

उन्होंने कहा कि अब 25 साल बाद, यह वर्षगांठ सिर्फ उसकी यात्रा को याद करने का मौका नहीं है, बल्कि यह सोचने का भी अवसर है कि आने वाले वर्षों में आईसीडब्ल्यूए की क्या भूमिका हो सकती है. यह सवाल आज इसलिए और भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि India बदल चुका है और दुनिया भी पहले जैसी नहीं रही.

उन्‍होंने कहा क‍ि आज India पहले की तुलना में दुनिया के कहीं अधिक देशों और क्षेत्रों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है. हमारे राष्ट्रीय हित अब पहले से ज्यादा वैश्विक हो गए हैं. हमारी जिम्मेदारियां बढ़ी हैं और दुनिया की India से अपेक्षाएं भी उसी अनुपात में बढ़ी हैं.

India अब वैश्विक चुनौतियों पर अपने विचार पहले की तुलना में कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ सामने रख रहा है, खासकर उन मुद्दों पर जो पूरी मानवता को प्रभावित करते हैं. जैसे-जैसे दुनिया में India की भूमिका बढ़ रही है, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय मामलों को लेकर हमारी बौद्धिक समझ और भागीदारी को भी उसी गति से आगे बढ़ना होगा.

जयशंकर ने कहा क‍ि अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर जो पारंपरिक सोच और चर्चा लंबे समय से चलती रही है, वह काफी हद तक दूसरे देशों के अनुभवों और वहां विकसित हुए विचारों पर आधारित रही है.

एक उभरते हुए India को अब दुनिया को देखने और समझने के अपने तरीके में अपनी बुद्धिमत्ता, अनुभव, हितों, विचारों और यहां तक कि अपनी शब्दावली को भी शामिल करना होगा. India को सिर्फ दूसरों की ओर से बनाए गए ढांचों के आधार पर दुनिया को नहीं समझना चाहिए, बल्कि अपनी सोच और अपने दृष्टिकोण के साथ वैश्विक विमर्श में योगदान देना चाहिए.

इस प्रयास में आईसीडब्ल्यूए की महत्वपूर्ण भूमिका है. भारतीय दृष्टिकोण से जानकारीपूर्ण और सार्थक चर्चा को बढ़ावा देकर, आईसीडब्ल्यूए हमें यह बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है कि हमारे सामने कौन-कौन से विकल्प मौजूद हैं. साथ ही, यह India के दृष्टिकोण को अधिक आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने रखने में भी योगदान देता है. इसलिए, किसी भी उभरते हुए राष्ट्र के विकास के दौरान जो बहसें और चर्चाएं होती हैं, उनमें आईसीडब्ल्यूए को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.

इस अवसर पर उपPresident सीपी राधाकृष्णन ने कहा क‍ि ब्र‍िक्‍स सम‍िट में सर्वसम्मति से अपनाए गए ‘New Delhi लीडर्स डिक्लेरेशन’ अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. इसमें कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया, जैसे कि सभी को साथ लेकर चलने वाली वैश्विक व्यवस्था, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करना, अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ावा देना. यह सर्वसम्मति से पारित घोषणा हम सभी के लिए एक बड़ी सफलता है.

उपPresident ने कहा क‍ि मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में भी विश्व व्यवस्था में बदलाव जारी रहेगा. आज India दुनिया के साथ ज्यादा सक्रिय रूप से जुड़ रहा है, उसका प्रभाव बढ़ रहा है और Prime Minister Narendra Modi के दूरदर्शी नेतृत्व में देश नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है. आज India को लगातार दुनिया में शांति, प्रगति और समृद्धि की आवाज़ के रूप में देखा जा रहा है.

एवाई/पीएम

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