
New Delhi, 15 सितंबर . India में साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस व्रियोनाइड्स ने एक विशेष बातचीत में साइप्रस मुद्दे पर 52 साल से जारी कब्जे के अपने निजी अनुभव, तुर्किए के साथ संवाद की संभावना, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) में साइप्रस की अहम भूमिका, ब्रिक्स की प्रासंगिकता और गाजा के लिए मानवीय सहायता में साइप्रस की भूमिका समेत कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी.
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर India में साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस व्रियोनाइड्स ने कहा, “एक अवधारणा के रूप में ब्रिक्स किसी भी एकाधिकार, चाहे वह वित्तीय हो या Political, को संतुलित करने के लिए एक बहुत ही अभिनव और दिलचस्प विचार है. यह एक सफल शिखर सम्मेलन था.”
जब भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) में साइप्रस की भूमिका को लेकर उच्चायुक्त इवागोरस व्रियोनाइड्स ने कहा, “प्रसिद्ध आईएमईसी, जैसा कि तीन साल पहले जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित किया गया था, अगर आप नक्शे को देखें, तो आपको एहसास होगा कि साइप्रस पश्चिम की ओर जाने वाला पहला यूरोपीय देश है. इसलिए, हम आईएमईसी से साइप्रस को बाहर नहीं कर सकते. हम पहले से ही यूरोपीय संघ के सदस्य के रूप में अपनी क्षमता के तहत आईएमईसी में शामिल हैं, लेकिन हम इससे अधिक सीधा जुड़ाव चाहते हैं, और हमने यह बात विदेश मंत्रालय में अपने समकक्षों के सामने रखी है.”
जब साइप्रस के मुद्दे पर यूएन की अगुवाई में समझौते की संभावनाओं के बारे में साइप्रस के मौजूदा आकलन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह 52वां साल है जब से हम साइप्रस में कब्जे में हैं. जब यह सब हुआ तब मैं छोटा लड़का था. एक सुबह, मैं मशीन गन की आवाज से उठा. यह ग्रीस का सैन्य जुंटा था जो हमारी Government को गिराने की कोशिश कर रहा था. इसके कुछ दिनों बाद, मैं बमबारी की आवाजों से उठा. यह जुलाई 1974 में तुर्किए का कुख्यात हमला था.
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष पर India में साइप्रस के उच्चायुक्त ने कहा कि यह एक और ऐसा युद्ध है जिसकी किसी को जरूरत नहीं थी और कोई नहीं चाहता था. दुनिया पहले ही हाल में कई युद्ध देख चुकी है. मैं यूक्रेन और गाजा में युद्ध की बात कर रहा हूं. मेरा विचार और मेरी इच्छा है कि युद्ध कम हों और एक दिन हम एक ऐसे ग्रह पर हों जो युद्धों से मुक्त हो.
India के साथ संबंधों में साइप्रस की प्रमुख प्राथमिकताओं पर व्रियोनाइड्स ने कहा, “मुख्य प्राथमिकताएं दशकों से हमारे बीच रहे बहुत मजबूत Political संबंधों के अलावा, पर्यटन और शिक्षा के क्षेत्र हैं. साइप्रस में बहुत सारे भारतीय छात्र हैं और हाल के कुछ वर्षों में, हमने देखा है कि आईटी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मियों को साइप्रस में नौकरियां मिल रही हैं.”
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को लेकर India में साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस व्रियोनाइड्स ने कहा कि हमारे संबंध बहुत उच्च स्तर पर हैं. कई दशकों से हमारा इतिहास जुड़ा हुआ है, जैसा कि आप जानते हैं, 1950 और 1960 के दशक में हमारे President माकारियोस और Prime Minister नेहरू के समय से. वे दोनों गुटनिरपेक्ष आंदोलन के सह-संस्थापकों में से थे. और भले ही हम 2004 में यूरोपीय संघ में शामिल हो गए और अब खुद को गुटनिरपेक्ष नहीं कह सकते, लेकिन मजबूत द्विपक्षीय भावनाएं, संवेदनाएं और गतिविधियां आज भी जारी हैं.
उच्चायुक्त से जब पूछा गया कि साइप्रस India और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को मजबूत करने में कैसे मदद कर सकता है तो उन्होंने कहा कि हम 2004 से यूरोपीय संघ के सदस्य हैं और 2008 से यूरोजोन के सदस्य हैं. पिछले साल इस प्रयास की परिणति जून 2025 में Prime Minister मोदी की साइप्रस यात्रा थी. इस दौरान एक द्विपक्षीय योजना, संयुक्त कार्य योजना पर हस्ताक्षर किए गए, जो अगले पांच वर्षों, 2025 से 2029 तक के लिए है. इसके अलावा, इस साल मई में हमारी President यात्रा हुई थी, जब President क्रिस्टोडौलाइड्स यहां आए थे. पिछले दो वर्षों में हमने उच्चस्तरीय अधिकारियों की कई यात्राएं देखी हैं.
पूर्वी भूमध्य सागर में नवीनतम सुरक्षा और समुद्री घटनाक्रमों पर साइप्रस की चिंताओं को लेकर उन्होंने कहा कि हम बहुत चिंतित हैं, क्योंकि जैसा कि आप भूगोल से जानते हैं. साइप्रस इजरायल से सिर्फ 300 किमी दूर है. हम बहुत चिंतित हैं और हमें उम्मीद है कि यह संकट बहुत जल्द कम होगा. बेशक, हम साइप्रस के रूप में और यूरोपीय संघ के सदस्य के रूप में, शांतिपूर्ण समाधान को सुविधाजनक बनाने के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, वह करेंगे.
तुर्किए के साथ सार्थक संवाद की संभावना को लेकर उन्होंने कहा कि अगर वे आकर बातचीत की मेज पर बैठते हैं तो बेशक हम उनके साथ बातचीत कर सकते हैं और साइप्रस मुद्दे को हल कर सकते हैं. हमारा मानना है कि तुर्किए को एक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक पड़ोसी होना चाहिए. हम वास्तव में यूरोपीय संघ में प्रवेश करने की तुर्किए की महत्वाकांक्षा का समर्थन करते हैं, लेकिन उन्हें उन सभी नियमों का पालन करना होगा जिनका पालन यूरोपीय संघ में शामिल हुए सभी देशों ने किया है.
साइप्रस गाजा को सहायता के लिए एक महत्वपूर्ण मानवीय और लॉजिस्टिक कड़ी बन गया है. इस पर India में उच्चायुक्त इवागोरस व्रियोनाइड्स ने कहा, “हमारी निकटता और इजरायल, फिलिस्तीन और अन्य अरब देशों के साथ हमारे उत्कृष्ट संबंधों के कारण, हम एकमात्र ऐसे देश थे जो मानवीय संपर्क स्थापित करने में सक्षम थे. आज तक, गाजा के लोगों को हजारों टन भोजन, पोषण और चिकित्सा आपूर्ति प्रदान की गई है.”
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केके/वीसी