
New Delhi, 24 अगस्त . India को वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र Government तेजी से काम कर रही है. उद्योग जगत, नीति विशेषज्ञों और व्यापार संगठनों ने Monday को कहा कि आधुनिक बंदरगाहों, बेहतर सड़क एवं रेल नेटवर्क और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईसी) जैसी परियोजनाएं देश के निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगी. साथ ही, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार, अनुपालन संबंधी बोझ में कमी और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने वाले कदम India की आर्थिक प्रगति को और गति देंगे.
राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुनील जे. सिंघी ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में देश में हाई-वे, रोड-वे, वॉटर-वे और अन्य बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है. उन्होंने कहा कि बंदरगाह अब व्यापार और लॉजिस्टिक्स की रीढ़ बन चुके हैं, जिससे माल की आवाजाही का समय कम हुआ है और वेयरहाउसिंग सुविधाओं के जरिए सामान तेजी से व्यापारियों तक पहुंच रहा है.
उन्होंने कहा, “आने वाले समय में लॉजिस्टिक्स का समय और कम होगा क्योंकि Government लगातार सुधार लागू कर रही है. व्यापारियों के लिए 40,000 से अधिक अनुपालनों को समाप्त किया गया है और ‘जन विश्वास विधेयक’ के जरिए लगभग 1,000 ऐसे प्रावधान खत्म किए गए हैं, जिनके चलते कारोबारियों को अनावश्यक उत्पीड़न या जेल जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता था.”
सिंघी ने विश्वास जताया कि India तेजी से निर्यात क्षमता बढ़ा रहा है और भविष्य में दुनिया के प्रमुख निर्यातक देशों में शामिल होगा. उन्होंने कहा कि भारतीय व्यापारियों से लेकर निर्यातकों तक सामान पहुंचाने की पूरी प्रणाली पहले से अधिक मजबूत और प्रभावी होती जा रही है.
वहीं, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के नेशनल प्रोग्राम डायरेक्टर और एनएचईवी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अभिजीत सिंह ने से बात करते हुए कहा कि आईएमईसी कॉरिडोर India को ट्रांसशिपमेंट हब बनाने की Prime Minister मोदी की सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
उन्होंने कहा, “दुनिया की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों पर निर्भर करता है और India के पूर्वी तथा पश्चिमी तट इसमें निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं. जब यह कॉरिडोर Dubai के रास्ते यूरोप तक पहुंचेगा और कांडला, जेएनपीए तथा मुंद्रा जैसे प्रमुख भारतीय बंदरगाह जेबेल अली और अबू धाबी पोर्ट से जुड़ेंगे, तब India की ट्रांसशिपमेंट क्षमता और रणनीतिक महत्व काफी बढ़ जाएगा.”
अभिजीत सिंह ने आगे कहा कि वर्तमान में भारत-मध्य पूर्व क्षेत्र में मौजूद कुछ भू-Political चुनौतियों का समाधान कूटनीतिक स्तर पर किया जाना आवश्यक है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आईएमईसी का जो हिस्सा पहले से विकसित हो चुका है, उसे जल्द संचालित कर आगे और मजबूत बनाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि बढ़ते वैश्विक व्यापार और माल ढुलाई की मांग को देखते हुए India के लिए आधुनिक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विकसित करना बेहद जरूरी है. अब तक इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा श्रीलंका के पास रहा है, लेकिन India तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है.
वहीं, इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस (आईसीआरआईईआर) की प्रोफेसर डॉ. सौमेन रॉय ने से कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद India के निर्यात प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है.
उन्होंने कहा, “यदि पिछले छह महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो India के निर्यात में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. India अब चीन जैसे बाजारों में इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात कर रहा है, जबकि सिंगापुर और अन्य देशों में भी भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है. इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है.”
डॉ. रॉय ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चुनौतियों, बढ़ते टैरिफ और वैश्विक व्यापारिक बाधाओं के बावजूद India का निर्यात लगातार बढ़ रहा है, जो देश की आर्थिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है.
इसके साथ ही, नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी ने से बात करते हुए कहा कि India की भविष्य की वृद्धि का सबसे बड़ा आधार डीप-टेक स्टार्टअप्स बनने वाले हैं.
उन्होंने कहा, “पिछले कई दशकों से हम छोटी और मध्यम कंपनियों के लिए ऋण उपलब्धता की चर्चा करते आ रहे हैं. लेकिन भविष्य की असली कुंजी डीप-टेक स्टार्टअप्स में है. मैं खुद कई ऐसे स्टार्टअप्स से मिला हूं जो नई तकनीकों के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम कर रहे हैं. यही कंपनियां भविष्य में India को वैश्विक नवाचार शक्ति बना सकती हैं.”
विरमानी ने आगे कहा कि India के विकास की अगली कहानी केवल परंपरागत उद्योगों से नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार, अनुसंधान और उन्नत स्टार्टअप्स से लिखी जाएगी.
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डीबीपी