असम सरकार ने 796 करोड़ रुपए की ‘स्विफ्ट’ परियोजना शुरू की; 71 बीलों को पुनर्जीवित करना मकसद

गुवाहाटी, 27 अगस्त . असम के Chief Minister हिमंत बिस्वा सरमा ने Thursday को ‘प्रोजेक्ट स्विफ्ट (एसडब्ल्यूआईएफटी)’ के जरिए पारंपरिक जल निकायों को फिर से जीवित करने की राज्य Government की कोशिशों पर जोर दिया. 796.88 करोड़ रुपए की इस पहल का मकसद ‘बील’ (स्थानीय आर्द्रभूमि/जलाशय) को बहाल करना, मछली उत्पादन बढ़ाना और स्थानीय समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करना है.

social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, सरमा ने कहा कि असम की ‘बीलों’ (आर्द्रभूमि या वेटलैंड्स) की कहानी “हमारे लोगों की कहानी से अलग नहीं है”, और उन्होंने राज्य की आर्द्रभूमियों के पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के लिए महत्व पर जोर दिया.

एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के सहयोग से चल रहा यह प्रोजेक्ट असम के 23 जिलों में फैली 71 बीलों को फिर से जीवित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा. इस पहल का लक्ष्य लगभग 4,000 हेक्टेयर जल निकायों का कायाकल्प करना है.

प्रोजेक्ट एसडब्ल्यूआईएफटी का लक्ष्य 6,000 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन करना है. इसके साथ ही, मछली उत्पादन को मजबूत करने और कायाकल्प किए गए जल निकायों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए, इस प्रोजेक्ट से सालाना लगभग 570 मिलियन मछली के बच्चों के उत्पादन की उम्मीद है.

इस पहल का मकसद मछली पालन और बीलों से जुड़ी अन्य गतिविधियों पर निर्भर समुदायों को सीधे तौर पर सशक्त बनाना भी है. प्रोजेक्ट के तहत, Government लाभार्थियों को 302 नावें और मछली पकड़ने के जाल बांटेगी. Government मछली पालन के क्षेत्र में आजीविका और उद्यमिता गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए 1,000 युवाओं को 50,000 रुपए का अनुदान भी देगी.

इस प्रोजेक्ट में स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए 30 मछली चारा इकाइयां और 100 मछली प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करना भी शामिल है, जिसका उद्देश्य स्थानीय मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना और आय के अतिरिक्त अवसर पैदा करना है.

राज्य Government ने इस पहल को पर्यावरण के संरक्षण और आर्थिक विकास को एक साथ लाने की कोशिश बताया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि असम की आर्द्रभूमियां उत्पादक प्राकृतिक संपत्ति बनी रहें और साथ ही उन पर निर्भर समुदायों को भी सहारा मिले.

बीलों के पुनरुद्धार से मछली पालन की उत्पादकता में सुधार होने और असम के जलीय संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

सरमा ने कहा कि यह पहल इन महत्वपूर्ण जल निकायों को बहाल करने में मदद करेगी, साथ ही टिकाऊ आजीविका पैदा करेगी और असम की प्रमुख प्राकृतिक संपत्तियों में से एक को संरक्षित करेगी.

एससीएच

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