अपनी उम्र पूरी कर चुकीं सरकारी ‘धक्कामार’ गाड़ियों की ‘छुट्टी’ करने का झारखंड सरकार ने बनाया प्लान

रांची, 4 नवंबर . Jharkhand के Governmentी दफ्तरों और Police थानों में सालों से खड़ी पुरानी और बेकार गाड़ियों की अब छुट्टी होने वाली है. 15 साल की उम्र पूरी कर चुके Governmentी वाहनों को व्यवस्थित तरीके से हटाया जाएगा. इनमें वे गाड़ियां भी शामिल होंगी, जो दुर्घटना के बाद थानों में पड़ी हैं और अब मरम्मत के लायक नहीं रह गई हैं. ऐसे वाहनों को नीलामी के बाद पंजीकृत स्क्रैपिंग केंद्रों में भेजा जाएगा.
परिवहन विभाग ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है. विभाग के सचिव राजीव रंजन ने Wednesday को प्रोजेक्ट भवन में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर पुराने और अनुपयोगी वाहनों की पहचान करने तथा उनके निस्तारण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि यह काम केंद्र Government के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा.
अक्सर Governmentी कार्यालयों और Police थानों में दुर्घटनाग्रस्त या खराब गाड़ियां लंबे समय तक खड़ी रहती हैं. इनका इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन ये जगह घेरती रहती हैं. कई बार इनकी मरम्मत भी संभव नहीं होती. अब ऐसे वाहनों को हटाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी. हालांकि, केवल 15 साल पुराना होने के आधार पर हर वाहन को स्क्रैप नहीं किया जाएगा. इसके लिए उसकी स्थिति और निर्धारित नियमों को देखा जाएगा. वाहनों को हटाने की प्रक्रिया में पहले संबंधित विभाग को उनकी जानकारी एमएसटीसी और Governmentी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल पर दर्ज करनी होगी. इसके बाद नीलामी की जाएगी.
नीलामी की प्रक्रिया पूरी होने पर वाहनों को पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा (आरवीएसएफ) केंद्र भेजा जाएगा, जहां उन्हें नियमों के मुताबिक नष्ट किया जाएगा. परिवहन सचिव ने कहा कि पुराने वाहनों को हटाने से Governmentी परिसरों में जगह खाली होगी और अनुपयोगी गाड़ियों के रखरखाव पर होने वाला खर्च भी बचेगा. इससे पर्यावरण संरक्षण और सड़क सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा. स्क्रैपिंग से मिलने वाली राशि और इससे जुड़े कर Governmentी खजाने में जमा होंगे.
बैठक में एमएसटीसी और आरवीएसएफ के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी. सचिव ने सभी विभागों के नोडल अधिकारियों को अपने यहां ऐसे वाहनों की पहचान कर जरूरी कार्रवाई करने को कहा. किसी तरह की तकनीकी परेशानी होने पर परिवहन विभाग से मदद लेने का निर्देश भी दिया गया.
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एसएनसी/डीकेपी


