Wednesday , 28 July 2021

योग उम्र के सभी पडावों पर हमें स्वस्थ रखने में सर्वश्रेष्ठ है- देवेंद्र अग्रवाल

उदयपुर (Udaipur). महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय के छात्र (student) कल्याण निदेशालय एवं विश्वविद्यालय क्रीड़ा मण्डल कें  जोनल स्पोटर्स काम्पलेक्स पर दिनांक 21 जुन, प्रातः 6.00 बजे विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डाॅं. नरेन्द्र सिंह राठौड एवं वरिष्ठ अधिकारी परिषद के सदस्यों ने योग गुरू देवेन्द्र अग्रवाल के सानिध्य में योगासन कर अन्तराष्ट्रीय योग दिवस मनाया.

डाॅ. सुध्ीार जैन, अध्यक्ष, विश्वविद्यालय क्रीड़ा मण्डल ने सभी अधिकारियों का स्वागत करतें हुए माननीय कुलपति महोदय एवं योग गुरू देवेन्द्र अग्रवाल का पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया. अपने स्वागत उद्बोधन में डाॅं. जैन नें बताया कि आज की इस दौड धूप भरी जिन्दगी में योग की आवश्यकता अधिक हो गई हैं. अतः आज तनाव, चिन्ता, कार्यप्रणाली में पूर्व की अपेक्षा बहुत बदलाव आ गया है वो हमें स्वस्थ रहने के लिए सुक्ष्म योग क्रियाओ को जानना जरूरी हो जाता है, ताकि हम स्वस्थ्य रह सकें.

कार्यक्रम अध्यक्ष माननीय कुलपति ने अपने सन्देश में कहा कि अन्तराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाना चाहिए लेकिन हमें इस क्रिया को मन व लग्न से प्रतिदिन करना आवश्यक है. योग भारतीय संस्कृति की विश्व को देन है. हमें योगासन प्राणायाम अवश्य करना चाहिए परन्तु अपनें स्वास्थ्य को और शरीर की आवश्यकतानुरूप उम्र के पडाव के अनुसार बिमारियों को ध्यान में रखकर करना चाहिए. यदि हम इस पर ध्यान नही देते तो कभी कभी इसके दुश्प्रभाव भी सामने आते है. योगासन के साथ साथ हमें खान पान पर भी बहुत ध्यान देने की आवश्यकता हैं. उन्होने गुरू के महत्व को बताते हुए कहा कि स्वास्थ्य के हितार्थ गुरू का आज के परिपेक्ष्य में होना आवश्यक हैं.

माननीय कुलपति महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय डाॅं. नरेन्द्र सिंह राठौड एवं योग गुरू देवेन्द्र अग्रवाल नें अन्तराष्ट्रीय योग दिवस पर आसनों का महत्व समझाते हुए, उनसे होने वाले फायदों के बारे में बतातें हुए कहा कि योगिक क्रियाओं से हमारे स्वास्थ्य के साथ शारीरिक, लचिलापन बढता है, योग हमें मानसिक तनाव से मुक्त करता है, चिन्ता, भय से हमें दुर करता है. कहा जाता है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है और योगासन प्राणायाम हमें उम्र के सभी पडाव पर स्वस्थ रखने में सर्वश्रेष्ठ है और इससे कोई हानि नही हैं.

योगगुरू ने उम्र के आधार पर योगासन से चित की एकाग्रता को भी समझाया और कहा कि कोरोना काल में इसकी प्राणयाम जैसी क्रियाए जो फेफडों को संक्रमित होने से बचाती है उन्हे तो अवश्य ही किया जाना चाहिए. अन्त में  डाॅ. सुध्ीार जैन ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया और अपनें 20 वर्षो के अनुभव आधारित स्वास्थ्य को सही रखने के विषय पर बताया.

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