
Mumbai , 9 अप्रैल . Maharashtra स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (महाट्रांसको) ने Thursday को अपनी महत्वाकांक्षी बभलेश्वर-कुडस 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन को सफलतापूर्वक चालू कर दिया, जिससे Mumbai महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर) में बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिली है.
नई शुरू हुई इस लाइन से Mumbai , ठाणे, पालघर और अहिल्यानगर जिलों में बिजली सप्लाई की स्थिरता, विश्वसनीयता और कुशलता बढ़ने की उम्मीद है. महाट्रांसको ने एक बयान में कहा कि इस प्रोजेक्ट से ट्रांसमिशन में होने वाला नुकसान लगभग 5 मेगावाट तक कम होगा और पूरे इलाके में वोल्टेज का स्तर बेहतर होगा.
खास बात यह है कि यह डबल-सर्किट ट्रांसमिशन लाइन 3000 मेगावाट तक की अतिरिक्त बिजली ट्रांसफर क्षमता देगी, जिससे तेजी से बढ़ रहे Mumbai इलाके में बिजली की बढ़ती मांग का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होगा.
यह प्रोजेक्ट मूल रूप से 2010 में मंजूर हुआ था और इसे 2013 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण इसमें कई बार देरी हुई. हालांकि, विभिन्न Governmentी एजेंसियों के आपसी तालमेल वाले प्रयासों और तेज शासन-प्रशासन की मदद से, यह प्रोजेक्ट आखिरकार मार्च 2026 में पूरा हो गया.
इस प्रोजेक्ट में लगभग 228 केएम लंबी लाइन पर 715 ट्रांसमिशन टावर लगाए गए. इनमें से 485 टावर और 304 सर्किट केएम का स्ट्रिंगिंग (तार खींचने) का काम नासिक डिवीजन के तहत पूरा हुआ, जबकि 230 टावर और 152 सर्किट केएम का काम वाशी डिवीजन के तहत पूरा हुआ.
इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में कई चुनौतियाँ आईं, जिनमें पुणे जिले में जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (जीएमआरटी) के पास से गुजरने के लिए विशेष अनुमतियां लेना भी शामिल था. इसके अलावा, जमीन के मुआवजे से जुड़े मुद्दे, वन विभाग से मंजूरी, राइट-ऑफ-वे से जुड़ी रुकावटें और सामान पहुंचाने में आने वाली लॉजिस्टिक चुनौतियां भी सामने आईं. बयान में कहा गया है कि जंगली इलाकों में सामान को हाथों से पहुंचाना पड़ा, जबकि कुछ हिस्सों में काम पूरा करने के लिए आधुनिक हॉटलाइन स्ट्रिंगिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया गया.
इस लाइन के चालू होने से मौजूदा पाडघे-बभलेश्वर ट्रांसमिशन लाइनों पर पड़ने वाला बोझ कम होगा और पूरे ग्रिड की विश्वसनीयता में काफी सुधार होगा. साथ ही, इससे कुडूस सबस्टेशन को बिजली का एक अतिरिक्त स्रोत भी मिलेगा, जिससे Mumbai इलाके में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी.
महाट्रांसको ने इस प्रोजेक्ट की सफलता का श्रेय स्थानीय जन प्रतिनिधियों, राजस्व अधिकारियों, Police और वन विभाग के सहयोग और समर्थन को दिया.
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एसडी/डीकेपी