Thursday , 21 January 2021

27 नवंबर को फेस रिकॉग्निशन सिस्टम के लिए पहला ट्रैकर लांच करेगी


हैदराबाद . इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन 27 नवंबर को फेस रिकॉग्निशन सिस्टम के लिए पहला ट्रैकर लांच करेगी. फाउंडेशन ने घोषणा की कि वह प्रोजेक्ट पैनोप्टिक को लांच को तैयार है, जो कि भारत का पहला फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी ट्रैकर है. कंपनी ने घोषणा की कि यह भारत भर में चेहरे की पहचान की तकनीक के प्रोजेक्ट के विकास और परिनियोजन को दर्शाता है. 27 नवंबर को यह लाइव किया जाएगा. इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने सरकार से डेटा सुरक्षा कानून के साथ-साथ चेहरे की पहचान तकनीक के बारे में विशिष्ट कानून बनाने की मांग की है.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने 308 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट के साथ स्वचालित फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम स्थापित करने और तस्वीरों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की योजना शुरू की है. प्रोजेक्ट का उद्देश्य पासपोर्ट डेटाबेस, क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स, इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम, खोयपाया पोर्टल, ऑटोमेटेड फ़िंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम और पुलिस (Police) या अन्य विभाग के किसी भी अन्य इमेज डेटाबेस से उपलब्ध डेटा एकत्र करके अपराधियों की पहचान करना है.

डेटा प्राइवेसी जानकारों का कहना है कि कानूनी सुरक्षा उपायों के बिना तकनीक के उपयोग से भेदभाव और बहिष्कार होगा. इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने कहा, एक मजबूत डेटा संरक्षण कानून के अभाव में, एएफआरएस बड़े पैमाने पर निगरानी कर सकता है. सरकारी एजेंसियों में डेटा साझा करने सहित डेटा संग्रह, भंडारण और डेटा के उपयोग के मामले में एएफआरएस को जवाबदेह रखने के लिए एक मजबूत डेटा सुरक्षा अधिनियम लाया जाना चाहिए.

इसमें तीसरे पक्ष के साथ डेटा साझा करना भी शामिल होना चाहिए. फाउंडेशन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (Home Ministry) और एनसीआरबी ने प्रस्ताव के लिए अनुरोध वापस लेने और चल रही निविदा प्रक्रिया को रोकने की मांग की. इसने सरकार को प्रौद्योगिकी के उपयोग पर तीन साल की मोहलत देने को कहा.

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