Saturday , 10 April 2021

वालधुनी नदी प्रदुषण मुक्ति की ओर अग्रसर

अंबरनाथ, . अंबरनाथ और बदलापुर एमआईडीसी की केमिकल कम्पनियों द्वारा भारी मात्रा में बिना ट्रीटमेंट किये दुषित केमिकल वालधुनी नदी में छोड़ा जाना गम्भीर समस्या बन गया था. चार वर्ष पहले महाराष्ट्र (Maharashtra) प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा एमआईडीसी को इसकी व्यवस्था करने के लिये कहा जा रहा था अंततः जुन 2018 में एमआईडीसी द्वारा टेंडर निकाला गया जिसमें, अंबरनाथ के फॉरेस्ट नाका से लेकर कल्याण-वसई की खाड़ी तक 17.5 किलोमीटर की पाइपलाइन द्वारा केमिकल का पानी अंबरनाथ एमआईडीसी के एफ्लुएंट प्लांट द्वारा ट्रीटमेंट करके सीधे खाड़ी में छोड़ा जायेगा, जिससे वालधुनी नदी में सीधे केमिकल छोड़ने से जो समस्या उत्पन्न होती थी वो समाप्त हो जायेगी. 17.5 किलोमीटर लंबे पाइपलाइन की इस परियोजना को प्रथम चरण में पूरा करने के लिये अंबरनाथ फॉरेस्ट नाका के पास 4 किलोमीटर के पाइप्स और कल्याण दुर्गाडी के निकट गणेश घाट पर 3 किलोमीटर के पाइप्स उतारे गये हैं. वहां खुदाई का भी काम शुरू हो चुका है. अंबरनाथ फॉरेस्ट नाका, मोरिवली एमआईडीसी होते हुये पाइप लाइन का कार्य धरमसी मोरारजी कम्पनी डीएमसी गेट, सर्कस मैदान से आगे जुना भेंडी पाड़ा रेलवे (Railway)पुल के पास से आगे बढ़कर वडोल गांव पुल उल्हासनगर कैम्प 3 तक पहुंचा है. जगह जगह पाइप उतारे गये हैं, स्टील ग्रिपिंग और सीमेंट कंक्रीट करने का कार्य भी चल रहा है. बरसात और कोरोना काल में कार्य थोड़ा धीमी गति से चल रहा था.

वालधुनी उल्हास नदी बिरादरी के सक्रिय पदाधिकारी शशिकांत दायमा ने कहा कि हम आशा करते हैं कि फॉरेस्ट नाका से खाड़ी तक कि 17.5 किलोमीटर की पाइपलाइन, अंबरनाथ एमआईडीसी में शुरू होने जा रहा सीईटीपी और उल्हासनगर, अंबरनाथ में वालधुनी नदी पर बन रहे 3 एसटीपी और उल्हास नदी पर एक पम्पिंग स्टेशन मिलाकर अब आने वाले कुछ सालों में वालधुनी नदी और उल्हास नदी को प्रदूषण मुक्त करेंगे. इसके लिए प्रशासन, वनशक्ति एनजीओ, नदी मित्रों, सामाजिक संगठनों और विशेषकर पत्रकारों का हार्दिक आभार.

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