Friday , 23 October 2020

यूपी का बजट तीन साल में पार कर जाएगा सात लाख करोड़


नई दिल्ली (New Delhi) . तमाम आर्थिक अड़चनों के बाद भी अगले तीन साल में राज्य की आर्थिक आंकड़े में बड़े बदलाव का पूर्वानुमान किया गया है. वर्ष 2023-24 में राज्य का बजट सात लाख करोड़ पार कर जाएगा, यह धनराशि इस साल के बजट से करीब दो लाख करोड़ रुपये अधिक होगी. वहीं राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद एसजीडीपी 25 लाख करोड़ से अधिक हो जाएगा. इन आंकड़ों से आने वाले वर्षों में राज्य के विकास की झलक दिख रही है. राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंध अधिनियम के अनुसार राज्य सरकार (Government) ने राजकोषीय सूचकों के साथ आने वाले तीन सालों के पूर्वानुमान का निर्धारण किया है.

पूर्वानुमान में 2019-20 से लेकर 2023-24 तक के आंकड़े दिए गए हैं. पूर्वानुमान में आर्थिक नजरिए से बड़ा बदलाव यह दिख रहा है कि तीन साल के अंदर ही राज्य के अनुमानित सालाना खर्च बजट से अनुमानित कर्जे का ग्राफ नीचे चला जाएगा. अभी कर्जे का आंकड़ा राज्य के कुल खर्च से अधिक है. इस वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्य सरकार (Government) कुल खर्च 5.13 लाख करोड़ है जबकि कर्ज 5.16 लाख करोड़ अनुमानित है. 2021-22 कुल सालाना खर्च 5.74 लाख करोड़ और कुल कर्ज भी 5.74 लाख करोड़ के करीब होगा. 2022-23 में कुल खर्च से कुल कर्ज का ग्राफ नीचे चला जाएगा. 2023-24 में राज्य सरकार (Government) का सालाना खर्च करीब 7.24 लाख करोड़ होगा तो वहीं कुल कर्ज 7.13 लाख करोड़ रह जाएगा. राज्य की सकल घरेलू उत्पाद एसजीडीपी में भी बड़ी उछाल तीन साल में देखने को मिलेगी. अभी राज्य की एसजीडीपी 1791263 करोड़ रुपये है. यह वर्ष 2023-24 में बढ़कर 2509774 करोड़ रुपये हो जाएगी.

करीब सात लाख करोड़ रुपये एसजीडीपी बढ़ जाएगी. सूचकांकों में अन्य चीजें हर साल एक ही लय से चलती नजर आ रही हैं. मसलन, राज्य सरकार (Government) की कुल राजस्व प्राप्तियों से अधिक प्रति वर्ष कुल खर्च. एक लय में बढ़ता राजकोषीय घाटा और उत्तरोत्तर बढ़ता राज्य का एसजीडीपी यानी राज्य की जनता के कमाने और टैक्स देने के ग्राफ के साथ ही राज्य सरकार (Government) की कमाई, खर्चे सब कुछ परंपरागत तरीके से चलते नजर आएंगे. विकास का यह क्रम बरकरार रहेगा. अब में और तब में अंतर यह रहेगा कि हर मद में धनराशि बढ़ती चली जाएगी.