Friday , 26 February 2021

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान नहीं रहे


नई दिल्ली (New Delhi) . केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार (Thursday) को दिल्ली में निधन हो गया. वे 74 साल के थे. वे पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और दिल्ली के एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में भर्ती थे. उनके बेटे चिराग पासवान ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी. पासवान के निधन की खबर सुनते ही देश की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई.

खगडिय़ा के एक दलित परिवार में जन्मे रामविलास पासवान ने एमए और एलएलबी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी. उन्होंने यूपीएससी क्लियर भी कर लिया और उनका चयन डीएसपी पद के लिए हो गया था. जब उनका चयन यूपीएससी में हुआ तभी वह समाजवादी नेता राम सजीवन के संपर्क में आए और राजनीति का रुख कर लिया. 1969 में वह अलौली विधानसभा से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और विधानसभा पहुंचे. इसके बाद पासवान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

1977 में वह जनता पार्टी के टिकट पर हाजीपुर से लोकसभा (Lok Sabha) का चुनाव लड़े और सबसे अधिक वोटों के अंतर से जीतने का विश्व रिकॉर्ड बना लिया. 1989 में रामविलास ने इसी सीट से अपना ही रिकॉर्ड तोड़ नया कीर्तिमान बनाया. बाद में उनका ये रिकॉर्ड भी नरसिम्हा राव समेत दूसरे नेताओं ने तोड़ा. पासवान पिछले 29 सालों में करीब हर प्रधानमंत्री के साथ काम कर चुके हैं. नरसिम्हा राव की कैबिनेट में वह नहीं थे. राम विलास पासवान ने साल 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी का गठन किया. राम विलास पासवान पार्टी के अध्यक्ष बने और लंबे अरसे तक रहे.

साल 2019 में लोकसभा (Lok Sabha) चुनावों से पहले राम विलास पासवान ने अपने बेटे चिराग पासवान को पार्टी का अध्यक्ष बना दिया. अब चिराग पासवान के कंधों पर पिता की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी है.

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