यूएन प्रमुख गुतारेस ने म्यांमार के बिगड़े हालात सुधारने के लिए एकीकृत कार्रवाई का आग्रह किया – Daily Kiran
Sunday , 28 November 2021

यूएन प्रमुख गुतारेस ने म्यांमार के बिगड़े हालात सुधारने के लिए एकीकृत कार्रवाई का आग्रह किया

 

जिनेवा . वैश्विक निगरानी की शीर्ष संस्था संयुक्त राष्ट्र ने अस्थिरता के संकट से जूझ रहे म्यांमार को लेकर चिंता जताई है. यूएन प्रमुख ने दक्षिणपूर्व एशिया के केंद्र में बहुआयामी ‘तबाही’ में बदलने से रोकने के लिए एकीकृत क्षेत्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई का आग्रह किया है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने महासभा में पेश की गई एक रिपोर्ट में आगाह किया कि यह अत्यधिक आवश्यक है कि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय देश म्यांमार को लोकतांत्रिक सुधार के रास्ते पर वापस लाने में मदद करें. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त माइकल बैचलेट और अधिकार समूहों ने बताया कि म्यांमार सेना ने जब एक फरवरी को आंग सान सू ची की निर्वाचित सरकार को सत्ता से बेदखल किया था, तब उसने दावा किया था कि उनकी पार्टी ने पिछले नवंबर में जो आम चुनाव जीता था उसमें धोखाधड़ी की गई थी. सेना के तख्तापलट के तुरंत बाद व्यापक पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए थे जिसे सुरक्षाबलों ने कुचलने की कोशिश की जिसमें 1,100 से अधिक लोग मारे गए.

संयुक्त राष्ट्र ने दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के 10 सदस्यीय संघ द्वारा अपनाई पांच सूत्री योजना का समर्थन किया, जिसमें मध्यस्थ और मानवीय सहायता के तौर पर आसियान विशेष दूत की नियुक्ति शामिल है. आसियान ने अगस्त में ब्रूनेई के दूसरे विदेश मंत्री एरिवान युसूफ को अपना विशेष दूत नियुक्त किया था. गुतारेस ने रिपोर्ट में युसूफ की नियुक्ति का स्वागत करते हुए ‘शांतिपूर्ण समाधान के लिए पांच सूत्री आम सहमति के समय पर और व्यापक क्रियान्वयन’ का आह्वान किया था. उन्होंने कहा, ‘बड़े पैमाने पर सशस्त्र संघर्ष के खतरे को दक्षिणपूर्व एशिया के केंद्र में या उससे आगे बहुआयामी तबाही को रोकने के लिए सामूहिक रुख अपनाने की आवश्यकता है. तेजी से बिगड़ती खाद्य सुरक्षा, बड़े पैमाने पर बढ़ता विस्थापन और कोविड-19 (Covid-19) के कारण कमजोर होती सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली समेत गंभीर मानवीय प्रभाव से निपटने के लिए समन्वित रुख अपनाने की आवश्यकता है.’ संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि म्यांमार में संवैधानिक व्यवस्था को बहाल करना और नवंबर 2020 के चुनाव नतीजों को बरकरार रखना अनिवार्य है. उन्होंने सुझाव दिया कि पड़ोसी देश, सेना पर ‘लोगों की इच्छा का सम्मान करने और देश तथा क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के वृहद हित में काम करने’ के लिए दबाव बना सकते हैं.

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