हत्‍या को आत्महत्या बताती है उदयपुर पुलिस ! – Daily Kiran
Sunday , 28 November 2021

हत्‍या को आत्महत्या बताती है उदयपुर पुलिस !

 100 से अधिक आदिवासियों ने दिया प्रशासन को अल्टीमेटम, पुलिस (Police) कार्यवाही पर उठाये सवाल, अब 45 दिन में दिलाये न्याय,  नही तो परिणाम के लिए जिम्मेदार होगा प्रशासन I

गाँव परोड़ा, सलुम्बर के 100 से ज्यादा आदिवासी समुदाय के लोग जयंतीलाल लालजी मीणा के साथ एक जुट हो जिला कलेक्ट्री पंहुचेऔर जिला पुलिस (Police) अधीक्षक, जिला कलक्टर (District Collector) और पुलिस (Police) महानिरीक्षक को रिपोर्ट देते हुएहत्या (Murder) के मामले में राजनितिक दखलअन्दाजी एवंहत्या (Murder) रों के उच्च प्रभाव के रहतेझल्लारा पुलिस (Police) थाना द्वारा 7 माह से अनुसंधान के नाम पर की जा रही लीपापोती और वक्तहत्या (Murder) मौजूद स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज नही किये जा करहत्या (Murder) को आत्महत्या साबित करने की कोशिश के खिलाफ अपनी हुंकार भरी और आरोप लगाया की पुरे गाँव को झल्लारा पुलिस (Police) से न्याय की उम्मीद नही है और प्रशासन को अल्टीमेटम दिया की यदि वरिष्ठ पुलिस (Police) अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराते हुए यदि प्रशासन 45 दिन में न्याय नही दिला पाता है और आदिवासी समाज में यदि कोई गंभीर घटना घटित होती है तो उस हेतु प्रशासन उत्तरदायी होगाIपीड़ित आदिवासी समुदाय की ओर से मौजूद एडवोकेट नरेन्द्र कुमार जोशी ने बताया की मृतक अरविन्द को30.03.2021 को रात्री 10:30 पर फोन आने पर वहबाहर गया और प्रात: लाश पेड़ पर बेल्ट सेटंगी मिली, मृतक के पिता जयंतीलाल द्वाराहत्या (Murder) रों की नामजद रिपोर्टपुलिस (Police) थाना- झल्लारा, जिला पुलिस (Police) अधीक्षक एवंजिला कलक्टर (District Collector)उदयपुर (Udaipur) को दी बावजूद आदेश झल्लारा पुलिस (Police) द्वारा राजनितिक प्रभाव एवंहत्या (Murder) रों के रसूख में आकर कार्यवाही करना तो दूर रहा, एफ आई आर तक दर्ज नही की, करीब 4 माह बाद न्यायालय आदेश पर मजबूरन एफ आई आर दर्ज तो की गई किन्तु पुलिस (Police) द्वारा प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान तक नहीलिखे जा रहे है, मृतक के परिवारजन द्वारा बार बार पुलिस (Police) थाना झल्लारा के चक्कर काटे गये तो 08.05.2021 को समस्त हीहत्या (Murder) रों ने मृतक के परिवारजन पर ही पत्थरबाजी करते हुए चढोतरा कर दिया और झल्लारा पुलिस (Police) ने उन्हीहत्या (Murder) रों का पक्ष लेते हुए मृतक के ही कुटुंबपरिवार के 18 लोगो को जिनमे 4 नाबालिग बालक भी शामिल थे, हवालात में बंद कर दिया I पुलिस (Police) द्वारा अकारण ही पीड़ित पक्ष को ही गिरफ्तार कर वर्दी वाली गुंडागर्दी कायम कीIमौजूद ग्रामवासी देवीलाल मीणा ने बताया की 7 माह से सम्पूर्ण गाँव में रोष व्याप्त है जिस कारण पूरा गाँव हीजिला प्रशासन से न्याय की गुहार लगाने आया है, पीड़ित परिवारजन विगत 7 माह से कानून और न्याय व्यवस्था पर भरोसा कर थक चुके है और एक बार फ़िर अंतिम रूप सेजिला प्रशासन को उक्त रिपोर्ट दे निवेदन कर रहे है की उक्त मामले की निष्पक्ष जांच सीनियर पुलिस (Police) अधिकारी से करवाई जाकर 45 दिन में ग्रामवासियों को न्याय दिलावे, ग्रामवासियों ने कहा की हम न्याय व्यवस्था और कानूनराज पर भरोसा करते है यह टूटे नही इसकी जिम्मेदारी अब प्रशासन की है I

आखिर क्यूँ आत्महत्या नहीहत्या (Murder) है ?

एडवोकेट नरेन्द्र कुमार जोशी ने बताया कीपुलिस (Police) थाना झल्लाराहत्या (Murder) को आत्महत्या साबित करने पर आमादा है जबकि एक सामान्य प्रज्ञावान व्यक्ति भी परिस्थितियों को देख समझ सकता है की यहहत्या (Murder) है, पुलिस (Police) द्वारा अपना फर्ज निभाया ही नही गया अन्यथा कब केहत्या (Murder) रे संलाखो के पीछे होते :-

  • रात्री 10:30 पर मृतक को फोन आना और उसके घर से जाने के बाद ही उसकीहत्या (Murder) होना ? एक सुनियोजित प्लान, जिसे पुलिस (Police) जानबुझकर नजर अंदाज कर रही हैI
  • पुलिस (Police) द्वारा न तो मृतक की कॉल डिटेल निकाली गई न ही इतनी रात्री कोकिस कारण फोन किया गया इस संदर्भ में कोई जानकारी ली गई और न ही मृतक की लोकेशन हिस्ट्री ट्रेक की गई?
  • मृतक को जिसका कॉल आया उस महिलाएवं उसके परिवारजन के साथ मृतक के संबंधो को भी पुलिस (Police) द्वाराउपेक्षितकिया गया, अन्यथाहत्या (Murder) की वजह स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रही है I
  • वह बेल्ट मृतक का नही थाऔर जिसका वह बेल्ट था वह भी आसानी से पता लगाया जा सकता है क्यूंकि परोडा एक छोटा सा गाँव है जिसमे इसहत्या (Murder) से पहले कई शादिया एवं सामाजिक कार्यक्रम हुए है जिनमे नामजद अभियुक्त्तगण शरीक हुए है और उनके फोटोग्राफ और वीडियोज उपलब्ध है I
  • जिस पेड़ पर मृतक को लटकाया गया, लाश के बिलकुल नजदीक डालिया ही डालिया थी, दम घुटने पर मृतक तुरंत ही दूसरी डाली का सहारा ले लेता लेकिन वास्तविकता मृतक को मार कर लटकाया गया I
  • जिस जगह मृतक को लटकाया गया वहा नजदीक खेत पर प्रत्यक्षदर्शी मौजूद थे किन्तु पुलिस (Police) थाना- झल्लारा मेहरबान हैहत्या (Murder) रों पर? आखिर क्यों मौजूद गवाहों के बयान नही लिखे गये ?
  • पूर्व में सेमारी पुलिस (Police) थाना क्षेत्र में भी हुई इस तरह की घटना बाद में सम्पूर्ण ग्रामीणों के धरना प्रदर्शन करने से पुन: निष्पक्ष जांच की तो सच आया सामने और गिरफ्तारिया हुई I
  • दसवी पढ़ा लिखा मृतक अरविन्द जिसे कोई मानसिक अवसाद नही और एक खुश मिजाज युवा था, आखिर क्यों मात्र 19 वर्ष की उम्र में वह भी जंगल में जाकर रात के समय में किसी और के बेल्ट से आत्महत्या करेगा, जिसके उपर कोई भी आर्थिक,सामाजिक एवं घरेलु जिम्मेदारी ही नही थी I
  • आत्महत्या का विचार करने वाला घर का कमरा बंद कर पंखे से लटकता है और रस्सी का इस्तेमाल करता है तो क्यों इस मृतक को रात को और वो भी बेल्ट से लटका कर की हुईहत्या (Murder) जो सामान्य प्रज्ञावान व्यक्ति भी समझ सकता है पुलिस (Police) थाना झल्लारा को आत्महत्या ही नजर आ रही है I
  • मृतक के परिवारजन पर चढोतरा और पत्थरबाजी कीहत्या (Murder) रों ने फिर भी मृतक का परिवार ही क्यों गिरफ्तार ? आखिर क्यों इतनी मेहरबानी पुलिस (Police) थाना- झल्लारा नामजदहत्या (Murder) रों के पक्ष में ?
  • पीड़ित परिवार को आज दिनांक तक एफ आई आर प्रति तक पुलिस (Police) द्वारा क्यों प्रदान नही की गई है I
  • इस घटना से करीब 6-7 माह पूर्व इन्हीहत्या (Murder) रों ने मृतक के साथ बेरहमी से मारपीट भी की थी I

एडवोकेट नरेन्द्र कुमार जोशी के अनुसार भारतीय संविधान में प्रत्येक व्यक्ति को फेयर इन्वेस्टिगेशन प्राप्त करने का अधिकार है किन्तु पुलिस (Police)का पक्षपाती रवैया मृतक एवं परिवारजन के मूल एवं कानूनी अधिकार का हनन है यदि इस निवेदन पत्र के पश्चात भी मृतक को न्याय प्राप्त नही होता है तो मृतक के परिवारजन को उच्च न्यायालय की शरण भी लेनी होगी ताकि वह अपने मौलिक एवं कानूनी अधिकारों की पालना  करवा पाए I

जिला कलेक्ट्री मौजूद हो 100 से अधिक परोड़ा ग्रामवासियों ने उक्त ह्त्या के केस का सीनियर पुलिस (Police) अधिकारी से अनुसंधान कराते हुए राजनितिक प्रभाव से दूर रह निष्पक्ष जांच हेतु जिला प्रशासन से निवेदन करते हुए जांच रिपोर्ट 45 दिन के भीतर पूर्ण करने का निवेदन किया साथ ही सन्देश भी दिया की यदि मृतक  को न्याय प्राप्त नही होता है तो गाँव में अराजकता और भयावह परिस्थितिया उत्पन्न होगी उस हेतु प्रशासन एवं पुलिस (Police) व्यवस्था जवाबदेह रहेगीI उक्त मामले पर संज्ञान लेने हेतु उक्त रिपोर्ट की प्रति ग्रामवासियों द्वारा संभागीय आयुक्त, उदयपुर (Udaipur), डाइरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (Police), राजस्थान, मुख्यमंत्री (Chief Minister) कार्यालय, प्रधानमंत्री कार्यालय एवं मानवाधिकार आयोग को डाक माध्यम से प्रेषित कर त्वरित न्याय की गुहार लगाईं है I

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