इस्लामाबाद, 28 फरवरी . पाकिस्तान के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) ने वाइल्ड पोलियोवायरस टाइप 1 (डब्ल्यूपीवी1) के दो और मामलों की पुष्टि की. इस साल कुल मामलों की संख्या 5 हो गई है.
एनआईएच के एक बयान के अनुसार, संस्थान में पोलियो उन्मूलन के लिए क्षेत्रीय संदर्भ प्रयोगशाला ने दक्षिणी सिंध प्रांत और पूर्वी पंजाब प्रांत से एक-एक मामले की पुष्टि की है.
बयान में कहा गया, “इस वर्ष सिंध में यह तीसरा और पंजाब में पहला पोलियो मामला है.” इसके मुताबिक इस साल देश में पोलियो के पांच मामले सामने आ चुके हैं.
यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई जब पाकिस्तान में एक बार फिर स्वास्थ्य कर्मियों को निशाना बनाया गया. अज्ञात बंदूकधारियों ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बाजौर जिले के दामादोला, मामुंड में पोलियो टीकाकरण टीम को सुरक्षा प्रदान कर रहे पुलिस अधिकारी हत्या कर दी.
बाजौर पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मोटरसाइकिल सवार बंदूकधारियों ने पोलियो टीकाकरण टीम पर हमला किया, जो बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने के लिए घर-घर जाकर अभियान चला रही थी. पोलियो टीम की सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस अधिकारी को हमलावरों ने गोली मार दी. हमलावर मौके से भाग गए.
इस महीने की शुरुआत में, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के एक अन्य जिले जमरूद में पोलियो कार्यकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात एक पुलिसकर्मी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
पाकिस्तान में पिछले कुछ दशकों में सैकड़ों पोलियो कार्यकर्ताओं को आतंकवादियों ने निशाना बनाया है और उनकी हत्या कर दी है. आंकड़ों के अनुसार, 1990 के दशक से देश में 200 से अधिक पोलियो कार्यकर्ता मारे गए हैं. आतंकवादियों के हमलों तेजी के कारण यह संख्या बढ़ती जा रही है.
विभिन्न आतंकवादी समूहों का दावा है कि पोलियो टीकाकरण अभियान बच्चों को नसबंदी करने की पश्चिमी साजिश का हिस्सा है.
पाकिस्तान दशकों से पोलियो वायरस को खत्म करने के लिए संघर्ष कर रहा है. पाकिस्तान और अफगानिस्तान दुनिया के दो ऐसे देश हैं जहां पोलियो के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं.
2024 के दौरान, पाकिस्तान में पोलियो वायरस के कम से कम 73 मामले सामने आए. इनमें से 27 मामले बलूचिस्तान से, 22 खैबर पख्तूनख्वा (केपी) से, 22 सिंध प्रांत से और एक-एक पंजाब और संघीय राजधानी इस्लामाबाद से थे.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 2 फरवरी को वर्ष का पहला पोलियो टीकाकरण अभियान शुरू किया, जिसका लक्ष्य पांच वर्ष से कम आयु के कम से कम 44.2 मिलियन बच्चों को टीका लगाना था.
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