बोत्सवाना से चीतों का तीसरा जत्था 28 फरवरी को भारत आएगा: सीएम मोहन यादव

Bhopal /New Delhi, 4 फरवरी . Madhya Pradesh के Chief Minister मोहन यादव ने Wednesday को New Delhi में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की. बैठक के बाद Chief Minister ने बताया कि बोत्सवाना से चीतों का तीसरा जत्था 28 फरवरी को India पहुंचेगा, जिसमें आठ चीते शामिल होंगे.

Chief Minister मोहन यादव ने कहा कि बैठक के दौरान Madhya Pradesh में पर्यटन विकास, आरक्षित वनों के विस्तार और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई. साथ ही चीतों के नए जत्थे को प्राप्त करने को लेकर राज्य Government की तैयारियों से भी Union Minister को अवगत कराया गया और केंद्र से आवश्यक सहयोग मांगा गया.

Union Minister भूपेंद्र यादव से मुलाकात के बाद Chief Minister ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा, “Madhya Pradesh असम से जंगली भैंसें लाने की योजना पर भी काम कर रहा है. इसके साथ ही 28 फरवरी को बोत्सवाना से आठ चीतों के आगमन को लेकर जरूरी व्यवस्थाओं और सहयोग पर चर्चा हुई है.”

दरअसल, Madhya Pradesh के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के श्योपुर जिले में स्थित कुनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में महत्वाकांक्षी चीता पुनर्वास परियोजना की शुरुआत की गई थी. इसके तहत 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीतों को लाया गया था, जबकि 18 फरवरी 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को India स्थानांतरित किया गया.

कुनो राष्ट्रीय उद्यान में दो चरणों में कुल 20 चीतों को छोड़ा गया था, जिनमें से अब तक नौ वयस्क चीतों की मौत हो चुकी है. हालांकि, लगातार हो रही मौतों के बावजूद शावकों के जन्म के चलते वर्तमान में कुनो में चीतों की कुल आबादी 30 से अधिक हो गई है.

अब आठ चीतों के तीसरे जत्थे के आगमन से पहले Madhya Pradesh Government ने इन विशाल बिल्लियों के लिए दूसरा आवास भी तैयार कर लिया है. राज्य के मंदसौर जिले में स्थित गांधी सागर वन्यजीव अभ्यारण्य को चीतों का दूसरा घर बनाया गया है.

हाल ही में कुनो राष्ट्रीय उद्यान से दो नर चीते, प्रभास और पावक, को गांधी सागर वन्यजीव अभ्यारण्य में स्थानांतरित किया गया था, जबकि मादा चीता धीरा को पिछले साल सितंबर में वहां भेजा गया था.

इससे पहले दिसंबर 2025 में बोत्सवाना की एक टीम ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों के साथ गांधी सागर अभ्यारण्य का दौरा किया था. इस दौरान संगरोध बोमा (बाड़े), नियंत्रण कक्ष और पशु चिकित्सालय सहित सभी तैयारियों की समीक्षा की गई, जिस पर टीम ने संतोष व्यक्त किया था.

एएसएच/डीकेपी

Leave a Comment