वक्फ संशोधन विधेयक में स्वायत्तता नहीं, सरकारी नियंत्रण है : अभिषेक मनु सिंघवी

नई दिल्ली, 3 अप्रैल . कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने गुरुवार को आरोप लगाया कि सरकार की मंशा वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 के जरिए वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता समाप्त कर सरकारी नियंत्रण स्थापित करना है.

राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान सिंघवी ने कहा, “इस विधेयक में क्या ही स्वायत्तता बची है. इसमें सिर्फ सरकारी नियंत्रण बचा है.” उन्होंने कहा कि पुराने कानून में वक्फ बोर्ड के सीईओ का मुसलमान होना आवश्यक था. साथ ही, जिन दो व्यक्तियों के नाम बोर्ड देता था, उनमें से एक को नियुक्त करना आवश्यक था. वर्तमान विधेयक में ये प्रावधान शामिल नहीं हैं.

कांग्रेस सांसद ने कर्नाटक हिंदू रिलिजियस इंस्टीट्यूशन चैरिटेबल एंडोमेंट एक्ट, माता वैष्णो देवी श्राइन एक्ट, जगन्नाथ मंदिर एक्ट, सिख गुरुद्वारा एक्ट और उत्तर प्रदेश काशी विश्वनाथ टेंपल एक्ट का उल्लेख करते हुए कहा, “मैं इस सम्मानित सभा से पूछना चाहूंगा कि क्या इनमें से एक में भी संबंधित समुदाय के अलावा किसी और को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया गया है?”

उन्होंने कहा कि भाजपा के “नए नवेले दोस्त” और तेलुगुदेशम पार्टी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि तिरुपति बोर्ड में गैर-हिंदू कैसे आ सकता है? उनकी सराहना करते हुए सिंघवी ने पूछा कि सरकार अब किस आधार पर यह आडंबर कर रही है. यह सौतेला व्यवहार, यह अलग-अलग कसौटी एक समुदाय के साथ क्यों अपनाई जा रही है?

‘वक्फ बाय यूजर्स’ पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सैकड़ों वर्षों से ‘वक्फ बाय यूजर्स’ प्रचलित है. कानून में, धर्म में, व्यवहार में स्थापित है. यदि सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय द्वारा यह तय कर दिया है कि ‘वक्फ बाय यूजर्स’ सही है, कानूनी है, तो ऐसे में इसे हटाने का तरीका एक ही है. हम सब जानते हैं कि कानून द्वारा आप किसी निर्णय को निरस्त नहीं कर सकते. आप सबसे ज्यादा यही कर सकते हैं कि उस निर्णय के आधार को हटा दीजिए. इस विधेयक के पहले प्रारूप में ‘वक्फ बाय यूजर्स’ के आधार को हटाने का प्रावधान किया गया था. इसका विरोध होने पर इसे भविष्य के लिए हटाया गया है, रेट्रोस्पेक्टिव नहीं.

सिंघवी ने कहा कि “जिस जगह सजदों के निशान थे, आज वहां दस्तावेज मांगे जा रहे हैं.” इसमें कई और बिंदु हैं, अगर उन पर विचार नहीं किया जाएगा, अगर इसे अहम के आधार पर पारित किया जाएगा, तो कोई संदेह नहीं है कि आने वाले कुछ वर्षों में इसे संवैधानिक करार दिया जाएगा.

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