Monday , 26 July 2021

बड़े शहरों में प्लानिंग की समस्या है और ज़ोनिंग प्रतिबंध कम से कम होने चाहिए: मंत्री सत्येंद्र जैन

नई दिल्ली (New Delhi) . दिल्ली के शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने प्रगति मैदान में आयोजित 28वां कन्वर्जेंस इंडिया और 6वें स्मार्ट सिटीज इंडिया एक्सपो का उद्घाटन किया. 24 से 26 मार्च तक चलने वाला यह आयोजन देश का सबसे बड़ा बी टू बी प्रौद्योगिक आयोजन है. यह कार्यक्रम भारत में स्मार्ट सिटी के अवसरों को खोलने और आर्थिक विकास को एक नई दिशा देने पर केंद्रित है. इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सत्येंद्र जैन ने कहा कि स्मार्ट बनने के लिए हमें सस्टेनेबल बनाना होगा. स्मार्ट और सस्टेनेबल विकास एक साथ चलते हैं.

सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली के लिए हमें बहु-स्तरीय इमारतों पर अधिक ध्यान देने और जमीनी कवरेज कम करने की आवश्यकता है. बड़े शहरों में प्लानिंग की समस्या हैं और ज़ोनिंग प्रतिबंध कम से कम होने चाहिए. उन्होंने कहा कि आज के समय में संपूर्ण विकास वाले मॉडल की आवश्यकता है. जो भी स्मार्ट है, वह कुशल और लागत प्रभावी होंगी. सत्येंद्र जैन ने आगे कहा कि हमें स्मार्ट के साथ-साथ सस्टेनेबल विकास को भी अपनाना चाहिए, लेकिन इसके विपरीत हम केवल स्मार्ट प्रगति पर ध्यान दे रहे हैं.पुरानी इमारतों की मरम्मत कराने पर भी हमें उम्मीद के अनुसार परिणाम नहीं मिलता है. बेहतर परिणाम के लिए हमें पुरानी इमारतें तोड़कर नया निर्माण करना चाहिए.

सत्येंद्र जैन ने बड़े शहरों की दिक्कतों के बारे में बताते हुए कहा कि बड़े शहरों में आज सबसे बड़ी दिक्कत प्लानिंग की है. आज शहरों के लिए जो मास्टर प्लान बनता है, वो बहुत ही सख्त है. यह हमारे देश के अलावा किसी और देश में नहीं होता है. आईटी सेक्टर की तरक्की के साथ आज लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं. ऐसे में अगर आपने 3 बेड रूम का एक फ्लैट बनाया और एक रूम आप ऑफिस के लिए इस्तेम्लाल करना चाहते हैं, तो आपको करना चाहिए. हमें शहरों के अंदर ज़ोनिंग प्रतिबंधों को भी कम करने की ज़रूरत है. साथ ही, हमें सूची बनानी चाहिए, जिससे हमें यह पता चले कि हम क्या नहीं कर सकते हैं.

सत्येंद्र जैन ने आगे कहा कि पूर्ण स्मार्ट होने के लिए हमें सस्टेनेबल होने की भी आवश्यकता है. आने वाले समय में सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है. बिजली की समस्या को सौर उर्जा से हल किया जा सकत है, लेकिन पानी की समस्या को नहीं, क्योंकि वह सीमित मात्र में उपलब्ध है और हमारी ज़रूरतें ज्यादा हैं. इसलिए हमें पानी को रिसाइकल करने की ज़रूरत है. पानी को बचाने के लिए हम काफी प्रयास कर रहे हैं. बारिश के पानी को हम जल्द से जल्द नदियों में डालकर समुद्र में पहुंचाने की कोशिश करते हैं, ताकि शहरों में पानी का जमाव न हो सके. किसी भी शहर को हरियाली की बहुत ज़रुरत होती है. दिल्ली के लिए हमें बहु-स्तरीय इमारतों पर अधिक ध्यान देने और जमीनी कवरेज कम से कम करने की आवश्यकता है.

शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली का भूमि क्षेत्र 15 वर्ग किलोमीटर है और जिस तरह से संख्या बढती जा रही है, उस तरह से हम कोई भी क्षेत्र खुला नहीं छोड़ेंगे. दिल्ली ने दो स्मार्ट सिटी बनाई है – रोहिणी और द्वारका. देश की आजादी के बाद एक चंडीगढ़ (Chandigarh) बना था, एक रोहिणी बने थे. रोहिणी को एक नियोजित बस्ती के रूप में बनाया गया था. रोहिणी को ऐसा बनाया गया था कि उसके लैंड प्लॉट का क्षेत्र सड़कों के क्षेत्र 50 प्रतिशत है. दुनिया में कोई भी ऐसी जगह नहीं है, जहां सड़कों का क्षेत्र दिल्ली जितना हो. सभी जगहों में 10 से 12 प्रतिशत सड़कों का क्षेत्र है, लेकिन इसके बाद भी दिल्ली की सड़कों पर भीड़ रहती है. इसलिए हमें इस बारे में बुनियादी रूप से सोचने की ज़रूरत है. शहरों की प्लानिंग में हमें जनता को भी शामिल करना चाहिए. एक समय पर दिल्ली के काफी सारे दफ्तर बंद होकर गुरुग्राम (Gurugram)में खुल गए, लेकिन आज अगरक आप दिल्ली-गुरुग्राम (Gurugram)बॉर्डर पर जाते हैं, तो आपको रोज़ 3 लाख से भी ज्यादा गाड़ियाँ दिल्ली आती दिखेगी. यह कोई समाधान नहीं है. हमें समस्याओं को समग्र रूप से देख कर उसका हल करना होगा. मुझे लगता है कि स्मार्ट सिटी कुशल और लागत प्रभावी होंगी.

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