
कोडरमा, 9 जून . कोडरमा के डोमचांच प्रखंड के मसनोडीह में छह दशक से अधिक समय से स्वादिष्ट आमों का उत्पादन हो रहा है. यहां उत्पादित आम अपनी मिठास से लोगों के रिश्तों में भी मिठास घोलने के साथ अपनी नई पहचान गढ़ रहा है. यहां के उत्पादित आमों की देश से लेकर विदेशों तक मांग है.
कोडरमा के मसनोडीह का नाम आज क्षेत्र के सबसे प्रसिद्ध आम बागानों में शुमार हो चुका है. डोमचांच के मसनोडीह गांव के आम बागान इन दिनों अपने खास स्वाद को लेकर गुलजार है. सिर्फ मसनोडीह में ही 10 आम बगानों में तकरीबन तीन हजार से ज्यादा पेड़ है, जो फलों से लदे पड़े हैं और फिलहाल यहां के गछपकु आम (पेड़ में पका) की काफी डिमांड है.
आम के खरीदार रोहित कुमार ने समाचार एजेंसी से बताया कि यहां के आमों में केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता है. बाजार में बिकने वाला आम कार्बेट से पकाए जाते हैं. अगर ऐसे आमों को घर में दो-तीन दिन रख लिया जाए तो सड़ जाता है. कार्बेट से पकाए आम में स्वाद बिल्कुल नहीं होता है. वहीं यहां के आम में स्वाद बेहतरीन है.
यहां के आम स्वास्थ्य के दृष्टीकोण से अच्छा होने के साथ स्वाद में भी बेहतर है, क्योंकि इसे पकाने और स्वादिष्ट बनाने के लिए किसी केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता. मसनोडीह में इन दिनों फलों के राजा आम की खरीदारी के लिए दूर-दराज से पहुंचने वाले खरीददार के अलावा फोन पर मिलने वाले डिमांड पर यहां आम की तोड़ाई की जा रही है. यहां हर बागान में सैकड़ों आम के पेड़ हैं. जिनमें एक दर्जन से अधिक प्रजाति के आम हैं.
आम बागान के मालिक विनय सिंह ने बताया कि हमारा बाग बहुत पुराना है. हमारे यहां के आम की मालदा जैसी जितनी भी वेराइटी है,सबका स्वाद अलग हो गया है. मालदा, जर्दालू, गुलाब खास, बम्बईया, हिमसागर और आम्रपाली आम की पैदावार की जाती है. पेड़ में समय-समय पर खाद और पानी देते रहते हैं,जिससे कीट नहीं लगते. घर के पास करीब 45 पेड़ लगाया गया है.
आम बागान के मालिक रमाकांत सिंह ने बताया कि यहां का आम Patna, दिल्ली और रांची जाता है. हालांकि पिछले सीजन में तीन पेटी आम अमेरिका भी गया था. यहां का स्वाद अलग होने के कारण डिमांड ज्यादा है. अगर उत्पादन की बात करें तो 100 क्विंटल से ज्यादा होता है. प्रमुख रूप से मालदा का उत्पादन करता हूं. हालांकि बम्बईया और हिमसागर की भी पैदावार करते हैं. पेड़ तीन से चार साल में फल देना शुरू करे देते हैं. इसके लिए किसी विशेष देखभाल की जरूरत नहीं होती है,समय पर खाद-पानी और कीटनाशक देता हूं.
यहां लोगों को सीधे पेड़ पर पके हुए ताजे आम मिलते हैं. यही वजह है कि रांची और Patna से भी लोग यहां आम की खरीदारी के लिए पहुंच रहें हैं. दूसरे प्रदेशों के ग्राहक को ट्रेन और बस के माध्यम से ऑर्डर पर डिमांड भेजा जाता है.
बागान की देखरेख कर रहे राजू मेहता ने बताया कि मसनोडीह का आम अब केवल कोडरमा या Jharkhand तक सीमित नहीं है. यहां के आम दिल्ली तक भेजे जा चुके हैं. इतना ही नहीं पिछले वर्ष कोडरमा के एक व्यक्ति ने अमेरिका में रहने वाले परिजनों के लिए 30 किलो आम मंगवाया था और इसबार भी मंगवाया है. उन्होंने बताया कि पूरे बागान की सुरक्षा के लिए 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है.
मसनोडीह के इन आम के पेड़ों में मालदा, जर्दालू, गुलाब खास, बम्बईया, हिमसागर, किशुन भोग, बेलखास, मणिका, सीपिया, फ़ज़ली सुकूल समेत आम की कई प्रजातियां है.
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एएसएच/डीकेपी