Tuesday , 15 June 2021

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, ईवीएम में चुनाव चिह्न रखे जाने पर क्या आपत्तियां


नई दिल्ली (New Delhi) .सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने अटॉर्नी जनरल और सॉलिसीटर जनरल से शुक्रवार (Friday) को जनहित याचिका पर जवाब मांगा. जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में मतपत्र से चुनाव चिह्न हटाकर उसके स्थान पर प्रत्याशी का नाम, उम्र, शैक्षिक योग्यता और फोटोग्राफ डाले जाने के लिए निर्वाचन आयोग को आदेश देने का अनुरोध किया गया है.

भारत के प्रधान न्यायाधीश (judge) एस ए बोबड़े, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने केंद्र और भारतीय निर्वाचन आयोग को कोई नोटिस जारी कर बिना याचिकाकर्ता अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय को उनकी याचिका की प्रति अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल तथा सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता को देने के लिए कहा. पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए अगले सप्ताह सूचीबद्ध कर कहा, आप एजी और एसजी को याचिका की प्रतियां दें. फिलहाल हम कोई नोटिस जारी नहीं कर रहे हैं.संक्षिप्त सुनवाई के दौरान पीठ ने उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह से जानना चाहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों में चुनाव चिह्न रखे जाने पर क्या आपत्तियां हैं. सिंह ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखा है, लेकिन उसका जवाब नहीं मिला है.

उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता इसकारण ईवीएम में चुनाव चिह्न के बजाय प्रत्याशी का ब्यौरा चाहते हैं, ताकि यह पता चल सके कि प्रत्याशी कितना लोकप्रिय है. सिंह ने कहा कि उन्होंने ब्राजील की व्यवस्था का अध्ययन किया जहां चुनाव चिह्न नहीं बल्कि प्रत्याशी को चुनाव लड़ने के लिए अंक दिए जाते हैं. पीठ ने सिंह से पूछा कि चुनाव चिह्न किस तरह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं. इसके बाद सिंह ने कहा कि इस बारे में वह अगली सुनवाई में बताएंगे. याचिकाकर्ता उपाध्याय ने यह घोषण करने का आदेश देने की भी मांग की कि ईवीएम में पार्टी के चिह्न का इस्तेमाल अवैध, असंवैधानिक और संविधान का उल्लंघन है.

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