Wednesday , 16 June 2021

गरीब होली पर घर जाने को तरस रहे

जबलपुर, 26 मार्च . ट्रेनों को स्पेशल बनाकर रेलवे (Railway)ने देशभर में करीब 70 फीसदी ट्रेनों को शुरू तो कर दिया है मगर गरीब यात्रियों (Passengers) के लिए अभी तक विचार नहीं किया है,जो कि कम दूरी के स्टेशनों की पैसेंजर ट्रेनों में यात्रा करते थे. 100-200 किमी तक रोजाना अपडाउन करने वाले, सरकारी, निजी कर्मचारी हों या छोटे व्यापारी आवाजाही के लिए स्पेशल ट्रेनों पर ही निर्भर हैं जहां किराया तो ज्यादा लगता ही है साथ ही आरक्षण करवाने की अनिवार्यता भी होती है. होली के त्यौहार के पर भी गरीब अपने घरों को नहीं पहुंच पा रहे हैं. गरीबों के पास अपने घर तक जाने के लिये अब केवल सड़क मार्ग ही एक मात्र सहारा बचा है. पिछले दिनों ने रेलवे (Railway)ने यह संकेत दिया था कि जबलपुर (Jabalpur)और बालाघाट तथा जबलपुर (Jabalpur)और इटारसी के बीच पैसेंजर ट्रेनें न चलाकर मैमू ट्रेनों का संचालन किया जाएगा.

गौरतलब है कि लॉकडाउन (Lockdown) के पूर्व पश्चिम मध्य रेल से 80 ट्रेनों का संचालन किया जाता था. गत वर्ष मार्च अंत से कोरोना संक्रमण के चलते करीब 6 माह रेल संचालन टोटल बंद रहा. इसके बाद धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ाई गईं और अब 65 ट्रेनों का संचालन हो रहा है. जो कि 80 फीसदी है. इन सभी ट्रेनों से रेलवे (Railway)को स्पेशल के नाम पर किराए में 20 फीसदी का इजाफा तो हो ही रहा है साथ ही आरक्षण शुल्क भी मिल रहा है.

ऐसे हो रही दिक्कत………………..

छोटे स्टेशन के स्टॉपेज नही- स्पेशल ट्रेनें एक्सप्रेस बनकर चलती हैं लिहाजा इनके स्टॉपेज पैसेंजर ट्रेनों की तरह छोटे स्टेशनों पर नहीं होते. इसके कारण बस या अन्य सड़क मार्ग से भारी भरकम किराया देकर वे यात्रा करने मजबूर हैं.
ज्यादा किराया- इन छोटे स्टेशनों से सफर करने वाले वे यात्री जो कम किराए में अपने गंतव्य तक पैसेंजर ट्रेनों से आते-जाते थे को यदि यात्रा करनी हो तो स्टॉपेज वाले स्टेशन तक अन्य साधनों से पहुंचना होता है. जिन स्टेशनों पर स्पेशल ट्रेन के स्टॉपेज हैं भी तो वहां से आरक्षण और अधिक शुल्क देकर ही यात्रा संभव हो पाती है.
अप-डाउनर्स (Nurse) की मुसीबत- पैसेंजर ट्रेनों के माध्यम से 100 से 200 किमी के जिला मुख्यालयों या नौकरी पेशा,छोटे व्यापारी,मजदूरी करने वाले लोग अपना मासिक पास बनवाकर यात्रा करते आए हैं. यह वर्ग पैसेंजर ट्रेनों के संचालन शुरू न किए जाने से निराश है.

एक ही हल मेमू ट्रेन……………

भोपाल (Bhopal) में मेमू ट्रेन के 8 रैक आकर खड़े हैं जिन्हें तीनों मंडलों में चलाया जाना है. इसी तरह नैनपुर में मैमू का एक रैक खड़ा है. सूत्रों के अनुसार इसी कड़ी में जबलपुर (Jabalpur)रेल मंडल को भी 2 मेमू ट्रेन के रैक मिलना है. इन मेमू ट्रेनों को कई दिनों से खड़ा रखा गया है और संचालन का निर्णय जिम्मेदार नहीं ले पा रहे हैं. यदि ये ट्रेनें भी चलने लगें और जैसा कि अपनी पत्रकारवार्ता में पमरे जोन के महाप्रबंधक शैलेन्द्र सिंह ने कहा भी है कि हम इन्हें पैसेंजर ट्रेनों के विकल्प के रूप में चलाएंगे तो भी समस्या हल हो सकती है.

फैक्ट फाइल………….

80 ट्रेन ओरीजनेट होती थीं डब्ल्यूसीआर से लॉक डाउन के पहले
65 ट्रेनों का होने लगा है संचालन
8 रैक मेमू ट्रेन के भोपाल (Bhopal) में एक नैनपुर में खड़ा हैं

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