मुंबई, 3 दिसंबर . महाराष्ट्र के आजाद मैदान में पांच दिसंबर को मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं. दूसरी तरफ मुख्यमंत्री के नाम पर अभी भी संशय के बादल छाए हुए हैं.
23 नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम आए. महायुति को जनता ने प्रचंड बहुमत दिया. लेकिन, अब तक महाराष्ट्र को अगला मुख्यमंत्री नहीं मिल पाया है.
जब इस पर महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत से प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि पहली बात यह है कि मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान और शपथ ग्रहण समारोह के लिए इतनी देरी नहीं होनी चाहिए थी. 26 नवंबर को मंत्रिमंडल अस्तित्व में आना चाहिए था. लेकिन यहां तो सत्ता का संघर्ष चल रहा है. इनके लिए जनहित महत्वपूर्ण नहीं है. सरकार जनता के लिए होती है. लेकिन, जिनकी इच्छाएं, आकांक्षाएं खुद के लिए होती हैं, तो ऐसे में विलंब होता ही है. महाराष्ट्र की अगली सरकार को 26 नवंबर तक आ जाना चाहिए था. देरी की वजह से जनता के साथ अन्याय हो रहा है.
एकनाथ शिंदे की नाराजगी पर उन्होंने कहा है कि यह तो उनका निजी मामला है. पता चला है कि उन्हें बुखार आया है. यह सत्ता का बुखार है. लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात हमारे लिए यह है कि महाराष्ट्र के अर्थव्यवस्था को बुखार आया है. महाराष्ट्र के किसानों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. आम आदमी महंगाई से त्रस्त है, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें सत्ता के लिए बुखार आया है.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बयान पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि कहीं पे निगाहें कहीं पे निशाना है. यह कटाक्ष है. जिनके लिए कटाक्ष किया गया, उन्हें यह समझ में आता है. यहां तो सत्ता का संघर्ष चल रहा है.
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