नई दिल्ली, 3 अप्रैल . राज्यसभा में गुरुवार को वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया गया. इस पर कांग्रेस का पक्ष रखते हुए राज्यसभा सांसद सयैद नसिर हुसैन ने कहा कि वक्फ का मायना दान है. कोई भी किसी को भी दान कर सकता है. उन्होंने कहा कि दान का कॉन्सेप्ट सिर्फ हमारे धर्म में नहीं है बल्कि हर धर्म में है.
राज्यसभा में गुरुवार को वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया गया. इस पर कांग्रेस का पक्ष रखते हुए राज्यसभा सांसद सैयद नासिर हुसैन ने कहा कि वक्फ का मतलब दान है. कोई भी किसी को भी दान कर सकता है. दान का कॉन्सेप्ट हर धर्म में है.
उन्होंने कहा कि हमारे दान के मकसद से बनाए गए इदारों की देखरेख करने के लिए वक्फ बोर्ड बनाया गया है. सोशल मीडिया पर यह फैलाया जा रहा है कि मुस्लिमों के तुष्टीकरण के लिए वक्फ बोर्ड बनाया गया है. शायद इनको पता नहीं और शायद ये बोलना भी नहीं चाहते कि इस देश में एंडोमेंट बोर्ड है, इस देश में हिंदू रिलिजियस प्लेसिस एक्ट है, इस देश में एसजीपीसी है, टेंपल भी ट्रस्ट है, क्रिश्चियन के लिए काउंसिल और कॉरपोरेशन है. हर धर्म के मामलों के नियमन के लिए अलग-अलग एक्ट बनाए गए हैं.
नासिर हुसैन ने कहा कि यह सबसे बड़ा झूठ फैलाया गया है कि वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को अपनी संपत्ति घोषित कर सकता है. उन्होंने कहा कि क्या हिंदुस्तान में कोई नियम कायदा, कानून या प्रॉपर्टी के नियम नहीं हैं. उन्होंने कहा कि हम रेल गाड़ियों में, हवाई जहाज में जाते हैं और कई बार नमाज भी पढ़ते हैं, तो ऐसे क्या रेलगाड़ी और हवाई जहाज भी हमारे हो गए?
उन्होंने कहा कि यदि वक्फ बोर्ड के सामने कोई शिकायत आती है, तो उसकी जांच होती है. जांच के लिए तय नियम हैं. उन्होंने कहा कि शायद अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को इन नियमों की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि पूरी जांच होने के बाद सर्वे कमिश्नर सर्वे करता है, कलेक्टर उसको चेक करता है. उसके बाद वह मामला राज्य सरकार को जाता है. राज्य सरकार उसका सत्यापन करके उसे गैजेट में शामिल करती है. इतना ही नहीं, इसके बावजूद भी यदि कोई असंतुष्ट है, तो वह व्यक्ति विवाद को लेकर ट्रिब्यूनल में जा सकता है. ट्रिब्यूनल में भी यदि उसके खिलाफ फैसला आता है, तो वह व्यक्ति कोर्ट में जा सकता है.
नासिर हुसैन ने कहा कि यह लोग कहते हैं कि वक्फ के खिलाफ कोर्ट में रिव्यू नहीं किया जा सकता है. लेकिन इसमें रिव्यू किया जा सकता है. अगर कोर्ट में रिव्यू नहीं किया जा सकता, तो फिर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वक्फ के इतने मामले कोर्ट में कैसे लंबित हैं? कैसे वहां इतने मामले पहुंचे हैं?
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जीसीबी/एबीएम/एएस