Sunday , 25 July 2021

लड़की को अगवा कर ले जा रहे थे गुंडे

बांदा . सच्चे दोस्त हमेशा आपकी मदद करने का रास्ता खोज लेते हैं. ऐसा ही यूपी के बांदा जिले के बिसंडा थाना क्षेत्र के मुस्लिम युवक के साथ हुआ. उसके हिंदू दोस्त ने कार से करीब 230 किलोमीटर तक पीछा कर अपहृत बहन को झांसी जीआरपी की मदद से बरामद कराया. ट्रेन में बहन के होने की जानकारी उसी से मुंबई (Mumbai) जाने वाले उसके तीसरे दोस्त ने दी. यह मामला 10 जून का है. इसकी जानकारी तब हुई जब एक आरोपी को पकड़ा गया और थाना पुलिस (Police) ने बिना कार्रवाई छोड़ दिया. मामला सोशल मीडिया (Media) में वायरल होते ही पुलिस (Police) की करतूत सामने आ गई. मामला बिसंडा थाना क्षेत्र के एक गांव का है.

गांव निवासी 17 वर्षीय युवती को बहला-फुसलाकर वहां के युवक ने अपहृत कर लिया. बांदा रेलवे (Railway)स्टेशन से तुलसी एक्सप्रेस ट्रेन में बैठाया. इसके बाद किशोरी को चार युवकों के हवाले कर दिया. चारों युवक किशोरी को मुंबई (Mumbai) ले जा रहे थे. बहन के घर लापता होने की जानकारी पर परेशान मुस्लिम युवक ने अपने हिन्दू दोस्त को व्यथा सुनाई. दोस्त के घर की इज्जत बचाने के लिए उसने जी-जान लगा दिया. सबसे पहले दोनों दोस्त अतर्रा रेलवे (Railway)स्टेशन गए.

वहां पूछताछ की, लेकिन कोई पता नहीं चला. इसपर रेलवे (Railway)स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज देखना चाहे. थाना, चौकी और स्टेशन मास्टर से मिले, पर फुटेज देखने को नहीं मिली. सूचना पर हिन्दू दोस्त ने अपनी बहन की कार मंगवाई और महोबा तक पीछा किया, पर ट्रेन आगे निकल चुकी थी. तुरंत महोबा जीआरपी से मदद मांगते हुए आगे बढ़े. मऊरानीपुर रेलवे (Railway)स्टेशन पहुंचे तो ट्रेन झांसी के लिए निकल चुकी थी. फिर झांसी जीआरपी से संपर्क कर कोच नंबर और किशोरी की फोटो भेजी. सूचना पर अलर्ट झांसी जीआरपी ने ट्रेन रुकते हुए कोच को घेर लिया. तलाशी ली और किशोरी को बरामद कर लिया, लेकिन उसे अगवा कर ले जा रहे आरोपित भाग निकले.

दोनों दोस्तों के मुताबिक, किशोरी की खोजबीन के दौरान बिसंडा पुलिस (Police) से मदद के लिए कई बार सीयूजी नंबर पर कॉल की, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ. किशोरी के बरामद होने पर क्षेत्रीय चौकी इंचार्ज को जानकारी दी तो उन्होंने संदिग्ध को हिरासत में लिया. पर बिना कार्रवाई दूसरे ही दिन छोड़ दिया. पीड़िता के भाई ने निराश होकर अपनी व्यथा सोशल मीडिया (Media) में वायरल कर दी, जिससे मामले ने तूल पकड़ लिया. हालांकि, अब पुलिस (Police) के उच्चाधिकारी भी इस मामले में बोलने से बच रहे हैं.

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