एमएसएमई के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान समूहों में करना होगा : नीति आयोग के सीईओ

नई दिल्ली, 26 मार्च . नीति आयोग के सीईओ, बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने बुधवार को कहा कि एमएसएमई के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान अलग-अलग नहीं, बल्कि समूहों में करना होगा.

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए सुब्रह्मण्यम ने कहा कि आज के एमएसएमई आने वाले समय में बड़े उद्यम बनेंगे.

उन्होंने आगे कहा कि सरकार भी सूक्ष्म उद्यम को लघु उद्यम में, लघु उद्यम को मध्यम और मध्यम को बड़े उद्यम में बनने में मदद कर रही है.

नीति आयोग के सीईओ ने एमएसएमई के सामने आने वाली तीन प्रमुख चुनौतियों के बारे में बताया, जिसमें टेक्नोलॉजी में सुधार, स्किल्ड वर्कफोर्स और क्वालिटी सर्टिफिकेशंस शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि भारत तब तक एक विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता, जब तक देश अपने मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम के मानकों को नहीं बढ़ाता.

उन्होंने कहा कि एजुकेशन, स्किल और एमएसएमई तीनों विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएंगे.

सुब्रह्मण्यम ने ‘डिजिटल एक्सीलेंस फॉर ग्रोथ एंड एंटरप्राइस’ या डीएक्स-ईडीजीई को भी लॉन्च किया. इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से सशक्त बनाना है जिससे वह भविष्य के लिए तैयार हो सके, साथ ही प्रतस्पर्धी और मजबूत बन सके.

उन्होंने आगे कहा कि इस पहल के तहत देशभर में डिजिटल परिवर्तन सुविधा केंद्रो का एक नेटवर्क स्थापित किया जाएगा. यह केंद्र एमएसएमएस कौशल और नवचार तक पहुंच प्रदान करेगा, जिससे वह स्थाई रूप से विस्तार कर सकें.

इस पहल के माध्यम से एमएसएमई को डिजिटल तकनीक और नवचार को अपनाने में सहायता मिलेगी, जिससे वह बदलते वैश्विक बाजार की चुनौतियों का सामना कर सकेंगे और भारत के आर्थिक विकास में योगदान दे सकें.

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के सचिव एससीएल दास ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों और उभरती चुनौतियों से निपटने और विकसित राष्ट्र बनने के लिए अत्याधुनिक तकनीक, डिजिटलीकरण और टेक्नोलॉजी एक आवश्यकता बन गई है.

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने भारतीय अर्थव्यवस्था में एमएसएमई के महत्व को बताते हुए कहा कि डीएक्स-एज इस क्षेत्र में टेक्नोलॉजी अपनाने में अंतर को पाटने में मदद करेगा.

एबीएस/