Thursday , 21 January 2021

राजस्थान में दशकों बाद पहली बार हुआ भालू के बच्चे का जन्म, तीमारदारी में जुटा है वन विभाग

-इंसान के बच्चे जैसी होती है भालू के बच्चे की रोने की आवाज, नाहरगढ़ पार्क में रखा जा रहा है खास ख्याल

जयपुर (jaipur) . गुलाबी नगरी जयपुर (jaipur)में कई दशकों की नाकाम कोशिशों के बाद पहली बार भालू के प्रजनन में कामयाबी मिल गयी है. नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क कि मादा भालू झुमरी एक बच्चे की मां बन गई है. पार्क प्रशासन झुमरी और उसके बच्चे को सुरक्षा देने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है. भालू के एनक्लोजर में केयरटेकर द्वारा उसकी खास निगरानी की जा रही है. पर्यटकों का प्रवेश इस इलाके में रोक दिया गया है. कुछ एक्स्ट्रा कैमरे भी लगाए जाने की भी तैयारी है.

राजस्थान (Rajasthan)में ये उपलब्धि बहुत ज्यादा मायने रखती है. जयपुर (jaipur)की स्थापना के बाद से लेकर यह पहला मौका है, जब यहां किसी मादा भालू ने बच्चे को जन्म दिया है.
जयपुर (jaipur)राजघराने ने कई बार भालू के प्रजनन की कोशिश कराई थी. ब्रिटिश हुकूमत के दौरान भी इसके काफी प्रयास किये गये, लेकिन कभी सफलता नहीं मिली. वन विभाग के गठन के बाद से भी ये कोशिशें की जा रही थी. लेकिन 70 साल में हर बार नाकामी हाथ लगी. 2015 में बिलासपुर (Bilaspur) से भालू की 2 जोड़ियां लाई गयी थी, उनमें से झुमरी और शंभू ही जिंदा बचे थे.

झुमरी पिछले साल भी गर्भवती हुई थी, लेकिन बच्चा पैदा होने से पहले ही मर गया था. पैदाइश के वक्त भालू के बच्चे का आकार बहुत छोटा होता है और वजन भी महज़ 200 ग्राम के करीब होता है. भालू के बच्चे की रोने की आवाज बिलकुल इंसान के बच्चे के रोने की तरह होती है. ऐसे में जब झूमरी के बच्चा हुआ तो एक बार केयरटेकर घबरा गए कि ये इंसान के बच्चे की रोने आवाज कहां से आई. जब बाद में देखा कि झूमरी ने बच्चे को जन्म दिया है तो इसकी सूचना सुनकर सभी की बांछें खिल गई. अभी भालू के बच्चे की जिस्म पर बाल नहीं हैं. झुमरी उसे अपने जिस्म से गर्मी दे रही है और किसी को देखने भी नहीं दे रही है. झुमरी को भी लालन पालन का अनुभव कम है. ऐसे निगरानी बहुत जरूरी है. अभी झुमरी बच्चे को 2 महीने तक दुनिया की नजर से दूर ही रखेगी.

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