झारखंड : चुनावी पोस्टरों में छाए रहे आलमगीर की गिरफ्तारी ने इंडिया गठबंधन की बढाईं मुश्किलें

रांची, 15 मई . झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन और मौजूदा सीएम चंपई सोरेन की सरकार में नंबर टू की हैसियत रखने वाले कैबिनेट मंत्री 60 वर्षीय आलमगीर आलम की बुधवार को हुई गिरफ्तारी से राज्य में ‘इंडिया’ गठबंधन को तगड़ा झटका लगा है.

राज्य की 14 लोकसभा सीटों में से मात्र चार सीटों पर चुनाव हुए हैं. आगे के तीन चरणों में दस लोकसभा सीटों का चुनाव बाकी है. माना जा रहा है कि भ्रष्टाचार का यह ताजा केस ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए चुनावी अभियान के दौरान परेशानी का सबब बनेगा.

आलमगीर आलम झारखंड में कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रहे हैं. राज्य सरकार में मंत्री के साथ-साथ वह झारखंड विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता भी हैं. चुनावी बैनरों-पोस्टरों में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ उनकी तस्वीरें प्रमुखता से लगाई जाती रही हैं.

तीन दिन पहले चतरा लोकसभा सीट पर जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे, तब भी मंच के बैकग्राउंड में आलमगीर आलम की तस्वीर प्रमुखता के साथ प्रदर्शित की गई थी. आलमगीर आलम राज्य विधानसभा के स्पीकर भी रह चुके हैं. स्पीकर रहते हुए विधानसभा में अवैध नियुक्तियों के मामले में भी वह आरोपों के घेरे में रहे हैं.

इसके अलावा साहिबगंज जिले के बड़हरवा में टेंडर से जुड़े एक विवाद में मनी लॉन्ड्रिंग का एंगल सामने आने के बाद ईडी ने आलमगीर आलम सहित 11 लोगों के खिलाफ वर्ष 2022 में एक मामला दर्ज किया था. इस मामले की भी जांच जारी है.

इसी बीच 6-7 मई को आलमगीर आलम के पीएस संजीव कुमार लाल और उनके घरेलू नौकरी जहांगीर आलम सहित कुछ अन्य करीबियों के घरों पर ईडी की छापेमारी में जब 37 करोड़ से ज्यादा कैश बरामद हुआ था, तभी यह तय माना जा रहा था कि इस भ्रष्टाचार की जांच शुरू होते ही वह इसकी जद में आएंगे.

ईडी ने पुख्ता सबूतों के आधार पर मंगलवार को करीब साढ़े नौ घंटे और बुधवार को छह घंटे तक उनसे पूछताछ की तो इस नतीजे पर पहुंची कि भ्रष्टाचार के इस मामले में उनकी सीधी संलिप्तता है. आलमगीर आलम मूल रूप से झारखंड के साहिबगंज जिले के बड़हरवा प्रखंड के इस्लामपुर गांव के निवासी हैं और झारखंड विधानसभा में पाकुड़ सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं.

1954 में जन्मे आलमगीर आलम ने बीएससी तक पढ़ाई की है. वह चार बार विधायक चुने गए हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1978 में गृह पंचायत महाराजपुर से सरपंच पद से की थी. उनका ताल्लुक सियासी परिवार से रहा है. उनके चाचा कांग्रेस से विधायक रह चुके थे. 1995 में कांग्रेस ने आलमगीर आलम को पहली बार पाकुड़ विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया था, लेकिन, वह बीजेपी के प्रत्याशी बेनी गुप्ता से हार गए थे.

इसके बाद साल 2000 में उन्होंने पाकुड़ विधानसभा से चुनाव लड़ा और बेनी गुप्ता को हराकर विधायक बने. उस समय झारखंड संयुक्त बिहार का हिस्सा था. बिहार सरकार में उन्हें पहली बार लघु सिंचाई मंत्री बनाया गया था. इसके बाद उन्होंने 2005, 2014 और 2019 में भी चुनाव जीता. 20 अक्टूबर 2006 से 12 दिसंबर 2009 तक आलमगीर आलम झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

एसएनसी/एबीएम