
New Delhi, 8 दिसंबर . Monday सुबह एक ऐसी खबर आई जो सीधे-सीधे उस युद्धविराम संकल्प के उलट थी जो अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों का अहम पड़ाव थी. दोनों ही पड़ोसियों ने एक-दूजे पर युद्धविराम समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया.
New Delhi, 8 दिसंबर . Monday सुबह एक ऐसी खबर आई जो सीधे-सीधे उस युद्धविराम संकल्प के उलट थी जो अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों का अहम पड़ाव थी. दोनों ही पड़ोसियों ने एक-दूजे पर युद्धविराम समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया.
वैसे इन देशों के बीच तल्खियों की वजह नई नहीं बल्कि बहुत पुरानी है. हाल ही में कैसे ये टकराव गंभीर स्थिति में परिवर्तित हुआ, ये भी ध्यान देने लायक है. दोनों देश के सेनाध्यक्ष एक दूसरे को बदलते सूरत-ए-हाल का जिम्मेदार मानते हैं.
2025 की 28 मई को कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि गोलीबारी की एक वारदात में उनके एक सैनिक की मौत हो गई. 2011 में हुए इसी तरह की घटना हुई थी. करीब 14 साल बाद इतिहास दोहराया गया.
फिर 23 जुलाई को थाइलैंड ने कंबोडिया से अपने उच्चायुक्त को वापस बुलाया और विवादित बॉर्डर पर हुए एक लैंडमाइन ब्लास्ट की घटना का जिक्र किया, जिसमें एक थाई सैनिक घायल हो गया था. उसने कहा कि वह कंबोडिया के एम्बेसडर को भी अपने देश से निकाल देगा.
24 जुलाई को बॉर्डर पर दोनों हथियारों के साथ आपस में भिड़े. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पहले फायरिंग करने का आरोप लगाया. थाईलैंड ने एफ-16 जेट तैनात किए, जिनमें से एक ने कंबोडियाई मिलिट्री टारगेट पर बमबारी की.
25 जुलाई वो तारीख थी जब फ्रंटलाइन पर तोपों से गोले दागे गए और रॉकेट बरसाए गए. ये ऐसी भिड़ंत थी जो लगभग एक दशक से देखने को नहीं मिली थी. इस लड़ाई में करीब 48 लोग मारे गए—ज्यादातर आम नागरिक—और रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बेघरों की संख्या 3 लाख के करीब बताई.
इसके अगले दिन ही ट्रंप एक्शन में आए. उन्होंने दोनों देशों के नेताओं से फोन पर बात की और सीजफायर को कहा. इसके बाद दोनों ही बातचीत पर सहमत हो गए. ट्रंप ने ये भी कहा कि एक बार सीजफायर हो जाने पर ट्रेड टैरिफ पर वाशिंगटन के साथ उनकी बातचीत फिर से शुरू हो सकती है.
28 जुलाई को मलेशिया, अमेरिका और चीन की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों के नेता मलेशिया के पुत्रजया में आमने-सामने बैठे. दोनों ने दुश्मनी खत्म करने, सीधी बातचीत फिर से शुरू करने और युद्धविराम करने के लिए एक सिस्टम बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए.
26 अक्टूबर को ट्रंप मलेशिया में थे. यहां वो आसियान सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे थे. यहीं पर थाईलैंड और कंबोडिया के नेताओं ने ट्रंप की मौजूदगी में एक बेहतर सीजफायर डील किया. इस बदले हुई परिस्थिति के बीच कंबोडिया ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट भी किया. यह समझौता तीन महीने पहले साइन किए गए सीजफायर पर आधारित है.
1 नवंबर को समझौते के एक हिस्से के तौर पर दोनों देशों ने कथित तौर पर विवादित बॉर्डर से भारी हथियारों को धीरे-धीरे हटाना शुरू कर दिया. शुरुआत रॉकेट सिस्टम से हुई, फिर डी-माइनिंग ऑपरेशन चलाए गए.
11 नवंबर को ही कुछ ऐसा हुआ जिसने तल्खियों में इजाफा कर दिया. थाईलैंड ने कहा कि लैंडमाइन ब्लास्ट में एक थाई सैनिक के घायल होने के बाद वह कंबोडिया के साथ सीजफायर समझौता तोड़ रहा है. वहीं, कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय ने नई लैंडमाइन बिछाने के आरोप से इनकार किया.
कंबोडिया के एक व्यक्ति की 12 नवंबर को मौत हो गई; पड़ोसियों ने एक-दूसरे पर गोलीबारी का आरोप लगाया.
इसके करीब 26 दिन बाद यानी 7 दिसंबर को दोनों के बीच तनाव चरम पर दिखा. कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल माली सोचेता ने थाई सेना पर प्रीह विहियर प्रांत के चोम क्रोसन जिले के फलान थॉम इलाके में दोपहर 2.15 बजे टकराव शुरू करने का आरोप लगाया.
तो वहीं, थाइलैंड के प्रमुख मीडिया आउटलेट द नेशन ने आर्मी प्रवक्ता के हवाले से बताया कि कंबोडियन सैनिकों ने सी सा केट प्रांत के कंथारालक जिले के फू फा लेक-फ्लान हिन पेट कोन इलाके में हमला किया, जिसके बाद 8 नवंबर को एयर स्ट्राइक का फैसला लिया गया.
थाईलैंड ने हवाई हमले शुरू किए. तर्क दिया कि उसके सैनिक कंबोडिया की ओर से हुई गोलीबारी की चपेट में आ गए. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम उल्लंघन का आरोप लगाया. इस बीच थाई अधिकारियों का कहना है कि लाखों नागरिकों को तनावग्रस्त इलाकों से निकाला जा रहा है.
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केआर/