तेजस्वी ने टोक्यो में कहा, जहां राजकुमार सिद्धार्थ ज्ञान प्राप्त कर गौतम बुद्ध बने, वहां दुनिया भर के पर्यटकों का स्वागत

पटना, 26 अक्टूबर . बिहार के उप मुख्यमंत्री सह पर्यटन मंत्री तेजस्वी यादव इन दिनों जापान के दौरे पर हैं.

उन्होंने गुरुवार को कहा कि जिन ऐतिहासिक स्थलों से गुजरते हुए राजकुमार सिद्धार्थ चले, ध्यान किया और बुद्धत्व का ज्ञान प्राप्त किया, उस बिहार में आप सभी का स्वागत है. जिस धरती पर दुनिया के महान तीर्थयात्रियों को इतिहास का खजाना मिला, जिस भूमि पर सभ्यता और संस्कृति अपनी गहरी जड़ें शताब्दियों पूर्व ही जमा चुकी थी, उस संस्कृति से रूबरू होने की चाह रखने वाले दुनिया भर के पर्यटकों का बिहार में स्वागत है.

तेजस्वी जापान की राजधानी टोक्यो में इन्क्रेडिबल इंडिया द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं. उपमुख्यमंत्री ने इस बेहतरीन कार्यक्रम के आयोजन के लिए जापान एसोसिएशन ऑफ ट्रैवल एजेंट्स (जेएटीए) 2023 के आयोजकों और भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय को भी धन्यवाद दिया.

उपमुख्यमंत्री द्वारा गुरुवार को जापान के जाटा ट्रैवेल शो में इन्क्रेडिबल इंडिया और बिहार पैवेलियन की संयुक्त रूप से शुरूआत भी की गयी, जहां अगले चार दिनों तक बिहार के पर्यटन स्थलों की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग होगी.

कार्यक्रम में तेजस्वी ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार राज्य में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं. बिहार कई धर्मों की जन्मस्थली और आध्यात्मिक जागृति की भूमि है. उन्होंने कहा कि बिहार में बौद्ध सर्किट को दो प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है. गंगा नदी के दक्षिण में हमारे पास बोधगया, राजगीर और नालंदा हैं जबकि गंगा नदी के उत्तर में हमारे पास वैशाली, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण हैं.

उन्होंने कहा कि इन बौद्ध स्थलों में से बोधगया उन सभी बौद्धों के लिए बहुत महत्व रखता है जो यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थली महाबोधि मंदिर की यात्रा करते हैं. एक दूसरी यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थली नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेषों को भी देखना आप सबके लिए एक कभी नहीं भूलने वाला अनुभव होगा. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय, जो हजारों साल पहले शिक्षा का दुनिया का एक प्रमुख केंद्र था और कई शताब्दियों तक दुनिया भर से विविध विषयों का अध्ययन करने के लिए हजारों छात्रों को आकर्षित करता था. राजगीर में गृद्धकूट पहाड़ी पर भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण स्थान है जहां उन्होंने कई साल बिताए और अपने कुछ सबसे महत्वपूर्ण उपदेश दिए.

तेजस्वी ने कहा कि 2000 वर्ष से अधिक पुराने कई मौर्यकालीन स्तूप आपको वैशाली, पूर्वी और पश्चिमी चंपारण में मिलेंगे, पूर्वी चंपारण में केसरिया स्तूप तो सबसे प्रमुख और दुनिया के सबसे ऊंचे स्तूपों में से एक है.

एमएनपी/एबीएम

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