Monday , 26 July 2021

तहसीलदार पर लगा रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप

बिलासपुर (Bilaspur) . इन दिनों रिश्वतखोरी की शिकायत चरम सीमा पर है और राजस्व विभाग की बात करें तो रिश्वतखोरी का दीमक पूरे विभाग को धीरे धीरे चट करते जा रहा है जरूरत है लोक सेवक के विरुद्ध रिश्वत मांगने की शिकायत पर निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही करने की, ताकि अन्य भृष्ट अधिकारी को कार्यवाही का डर हो और आम जनता को रिश्वतखोर अधिकारी से छुटकारा मिल सके.

हाल ही में एक पीडि़त नें मस्तुरी तहसीलदार पर, शासकीय जमीन को निजी लोगो के नाम पर रिश्वत लेकर ट्रांसफर करने का गंभीर आरोप लगा है,आरोप है कि नामांतरण के लिए पैसा मांगा जाता है और पैसा नही मिलने पर नामांतरण नहीं किया जाता,बल्कि पेशी की तारीख बढ़ा दी जाती है. ग्रामीणों ने मस्तुरी तहसीलदार मनोज खांडे पर गंभीर आरोप लगाए है,साहब पर आरोप है कि इन्होंने कईं शासकीय भूमि को रिश्वत लेकर लोगों के नाम पर नामान्तरण कर दिया है.

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम किरारी के कोटवार बहुरमन को शासन से खेती करने के लिए जमीन मिली है जिस पर वह खेती करता है लेकिन मस्तुरी तहसीलदार द्वारा शासकीय कोटवारी जमीन जिसका खसरा नम्बर 126 को किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर नामान्तरण कर दिया गया है. ग्रामीणों ने बताया कि पचपेड़ी क्षेत्र के ग्राम खमहिया में शासकीय भूमि जिसका खसरा नम्बर.151/103 है जो कि रिकार्ड में छोटे झाड़ का जंगल है जिसे बिना कलेक्टर (Collector) के अनुमति के निजी व्यक्ति के नाम पर नामान्तर कर दिया गया है. मस्तुरी तहसीलदार द्वारा नामान्तरण करने के लिए भूमि स्वामी से रिश्वत की मांग की जाती है और नही देने पर उनका काम रोक दिया जाता है.

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) शासन के नियमानुसार ऑनलाइन नामान्तरण करने के लिए 45 दिन का समय निर्धारित किया गया है लेकिन रिश्वत नहीं देने पर तहसीलदार नें समयावधि निकल जाने के बाद भी आज तक कई किसानों का नामान्तरण रोक रखा है और गरीब किसान मस्तुरी तहसील कार्यलय का चक्कर काट रहे है. ग्राम मोहतरा निवासी अजीत कुमार सुमन पिता स्व.सतेराम सुमन बतलाते हैं कि उनका बंटवारा के लिए मस्तुरी तहसील में प्रकरण चल रहा है जिस पर अजीत को हर सप्ताह पेशी के लिए बुलाया जाता है और मस्तुरी तहसीलदार द्वारा रिश्वत की मांग की जाती है. अजीत के बताए अनुसार तहसीलदार बार बार पैसे की मांग करता है और नही देने पर जेल भेज देने की धमकी देता है अजीत की माने तो वे तहसील कार्यालय का चक्कर काट कर तंग आ चुका है अंत में रिश्वतखोर तहसीलदार के खिलाफ कलेक्टर (Collector) में शिकायत किया गया है.

ऐसे भृष्ट अधिकारियो की वजह से मस्तुरी के किसानों में आक्रोश बढ़ रहा है देखना होगा शिकायत के बाद ऐसे भ्रस्ट अधिकारी पर क्या कार्यवाही होती है और पीडि़तों को न्याय मिलता है कि नहीं!यहां आपको बताना है कि राजस्व विभाग में ऐसा कोई नही है जो बिना पैसो के काम करता है हर कोई पैसा लेकर काम करता है और तो और जब तक पैसा नही मिलता पीडि़त पक्ष को इतना घुमाया जाता है कि जब तक वह थक नही जाए, या फिर उसके प्राण न निकल जाए,जी हां ऐसा हम इसलिये कह रहे है क्योंकि ऐसे कई मामले में हुआ है जिसमे पीडि़त पैसा भी दे देता है तब भी उसका काम नही होता है और उसे बार बार चक्कर लगाना पड़ता है. इधर राजस्व विभाग में पदस्थ भ्ष्र्ट लोगो के खिलाफ कार्यवाई नही होने से उनके हौसले बुंलद होते जा रहे है. और दिनों दिन पैसो की बरसात करवा रहे है. ऐसा लगता है कि अब इनको किसी का कोई डर नही है.

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