Wednesday , 23 June 2021

ओड़िशा से लौटी सुंदरी, कान्हा रिजर्व में रहेगी

भोपाल (Bhopal) . ओड़िशा के सतकोशिया टाइगर रिजर्व में ढाई साल से कैदियों का जीवन गुजार रही बाघिन सुंदरी की आखिर घर वापसी हो गई. कान्हा टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम बाघिन को लेकर लौट गई है. बाघिन को घोरेला स्थित विशेष बाड़े में छोड़ा जाएगा या नहीं, यह उसकी सफर के बाद की स्थिति देखकर तय होगा. ज्ञात हो कि मीडिया (Media) में बाघिन की दयनीय स्थिति की खबरें आने पर मुख्यमंत्री (Chief Minister) शिवराज सिंह चौहान ने ओड़िशा के मुख्यमंत्री (Chief Minister) को पत्र लिखकर वापस लाने की व्यवस्था होने तक बाघिन का ध्यान रखने का आग्रह किया था. वहीं सरकार ने तत्काल बाघिन को लाने की अनुमति दी थी.

कान्हा टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक एसके सिन्हा के नेतृत्व में पार्क के डॉ. संदीप अग्रवाल सहित अन्य कर्मचारियों का दल रविवार (Sunday) को सतकोशिया भेजा गया है. मंगलवार (Tuesday) शाम ये दल बाघिन को ट्रंकुलाइज कर वाहन से लेकर रवाना हो गया. सतकोशिया से करीब 175 किलो मीटर चलने के बाद दल ने संबलपुर में रात्रि विश्राम किया और बुधवार (Wednesday) सुबह से फिर लगातार चला. 616 किलो मीटर का सफर तय कर बाघिन बुधवार (Wednesday) देर रात पार्क पहुंची.मालूम हो ‎कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बाघ विहीन हो चुके सतकोशिया टाइगर रिजर्व को आबाद करना चाहते थे. उनकी मांग पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और राज्य सरकार (State government) ने जून 2018 में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सुंदरी व कान्हा टाइगर रिजर्व से बाघ महावीर को सतकोशिया भेजा था.

जानकार बताते हैं कि पार्क में बाघ-बाघिन के खाने का पर्याप्त इंतजाम नहीं था, इसलिए वे जंगल से बाहर आबादी तक पहुंच गए और बाघिन ने तीन लोगों पर हमला कर दिया. इसलिए उसे अक्टूबर 2018 में पार्क के एक बाड़े में कैद कर दिया गया, तब से वह वहीं थी. जबकि बाघ महावीर को जहर देकर मार दिया गया था. उल्लेखनीय है कि बाघिन बेहोशी की हालत में है और लंबे सफर के कारण थकान होने से कई बार स्थिति खराब हो जाती है. टीम के प्रभारी एसके सिन्हा ने बताया कि सफर के दौरान बाघिन की लगातार जांच की जा रही है. वह पूरी तरह से स्वस्थ है, पर रात में ही उसे बाड़े में छोड़ेंगे या नहीं, यह पार्क पहुंचने के बाद बाघिन की जांच होने के बाद ही तय होगा.

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