श्रीलंकाई नौसेना ने 8 तमिलनाडु मछुआरों को किया गिरफ्तार, दो नाव भी जब्त

चेन्नई, 8 दिसंबर . श्रीलंकाई नौसेना ने तमिलनाडु के रामेश्वरम से आठ मछुआरों को गिरफ्तार किया है. उन पर आरोप है कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पार करके नेदुनथीवु के पास मछली पकड़ रहे थे.

तमिलनाडु तटीय पुलिस के अनुसार, उन्हें रविवार तड़के गिरफ्तार किया गया. श्रीलंकाई नौसेना ने उनके पास से दो महंगी मशीनीकृत मछली पकड़ने वाली नौकाएं भी जब्त कीं.

हिरासत में लिए गए मछुआरों को जांच के लिए कांकेसंतुरई बंदरगाह शिविर ले जाया गया. उसके बाद, उन्हें जाफना मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों को सौंपा जाएगा.

यह घटना 4 दिसंबर की है, जब तमिलनाडु के 14 मछुआरों को गिरफ्तार किया गया और कच्चाथीवु के पास दो मछली पकड़ने वाली नौकाओं को जब्त किया गया.

इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी रहे मछुआरों का कहना है कि श्रीलंकाई नौसेना ने उन पर हमला किया, जिससे उनके मछली पकड़ने के जाल और जीपीएस उपकरण खराब हो गए. कुछ मछुआरों ने यह भी आरोप लगाया कि नौसेना ने जानबूझकर उनकी नौकाओं को टक्कर मारी, जिससे भारी नुकसान हुआ.

3 दिसंबर को श्रीलंकाई नौसेना ने आरोप लगाया कि तमिलनाडु के 18 मछुआरे आईएमबीएल पार कर गए थे. उन्हें नेदुनथीवु के पास हिरासत में लिया गया और उनकी दो नौकाओं के साथ कांगेसन नौसेना बेस पर आगे की जांच के लिए ले जाया गया.

तमिलनाडु के मछुआरों की बार-बार हो रही गिरफ्तारियों से मछुआरे काफी परेशान हैं.

तमिलनाडु तटीय पुलिस के मुताबिक, श्रीलंकाई अधिकारियों ने इन मछुआरों पर श्रीलंकाई जलक्षेत्र में घुसकर अवैध मछली पकड़ने का आरोप लगाया है.

16 जून, 2024 से श्रीलंकाई नौसेना ने तमिलनाडु के 425 मछुआरों को गिरफ्तार और 58 नावों को जब्त किया था.

इन मछुआरों में से कई श्रीलंकाई जेलों में बंद हैं, जिसे लेकर पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है.

हाल ही में श्रीलंका यात्रा के दौरान केंद्रीय विदेश मंत्री ने श्रीलंकाई सरकार से इन गिरफ्तारियों पर चर्चा की थी.

हालांकि इन चर्चाओं के बाद भी गिरफ्तारियां लगातार हो रही हैं, जिससे मछुआरों में डर बढ़ गया है.

तमिलनाडु मीनावर पेरावई के महासचिव ए. थजुधिन ने मछुआरों और उनके परिवारों के सामने आ रही बढ़ती कठिनाइयों पर चिंता जताई.

उन्होंने कहा, “हमारे मछुआरों की आजीविका खतरे में है. मछली पकड़ने और इससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर हजारों परिवार परेशान हैं. मछुआरे और उनके परिवार समुद्र में जाने से डरने लगे हैं.”

एसएचके/केआर