टेलीकॉम कंपनियों को रियायत 2जी से बड़ा स्पेक्ट्रम घोटाला? – Daily Kiran
Saturday , 23 October 2021

टेलीकॉम कंपनियों को रियायत 2जी से बड़ा स्पेक्ट्रम घोटाला?

नई दिल्ली (New Delhi) 1.92 लाख करोड़ रुपए की देनदारियों का सामना कर रही वोडाफोन – आइडिया जैसी टेलीकॉम कंपनियों को रियायत देते हुए केंद्र सरकार (Central Government)ने बुधवार (Wednesday) को जो घोषणाएं की हैं उससे 2जी स्पेक्ट्रम से बड़े घोटाले की बू आ रही है. यही नहीं सरकार की इस दरियादिली के कारण देश के खजाने पर भारी वित्तीय भार पड़ने वाला है. एक तरफ तो सरकार का कहना है कि वह टेलीकॉम सेक्टर में मोनोपोली खत्म करने के लिए यह रियायत दे रही है दूसरी तरफ हजारों करोड़ रुपए न चुकाने की स्थिति में 4 साल बाद भी इन कंपनियों की देनदारियों को इक्विटी में बदलने का फैसला निजी कंपनियों के सफेद हाथी को पालने के समान ही है जिसे बीएसएनल जैसी सरकारी कंपनियों की कीमत पर किया जा रहा है. सरकार इतनी ही दरियादिली सरकारी टेलीकॉम कंपनियों के प्रति दिखाती तो शायद आज देश में सरकारी टेलीकॉम कंपनियों के सुनहरे दौर की वापसी हो सकती थी.

वोडाफोन – आइडिया पर अप्रैल – जून तिमाही तक 1.92 लाख करोड़ रुपए का कर्ज बकाया था जिसमें स्पेक्ट्रम पेमेंट का 1.06 लाख करोड़ और एजीआर अर्थात एडजेस्टेड ग्रॉस रिवेन्यू का 62 हजार 180 करोड़ रुपए था. इसके अलावा वोडाफोन- आइडिया पर बैंकों और वित्तीय संस्थाओं का 23400 करोड़ रुपए का कर्ज भी बकाया है. इतने कर्जे में डूबी हुई टेलीकॉम कंपनियों को सरकार 4 साल के भीतर तकरीबन 28500 हजार करोड़ रुपए की रियायत देगी. इसमें से 16 हजार करोड़ वोडाफोन – आइडिया, 9500 करोड़ भारती एयरटेल और 3000 करोड़ का फायदा रिलायंस जियो को होगा. यह कंपनियां इस पैसे का उपयोग 5जी पर निवेश करने में करेंगी. इसका अर्थ यह हुआ कि सरकार के ही पैसे से 5जी का निवेश किया जाएगा लेकिन 5जी के निवेश में बीएसएनएल की कोई भागीदारी नहीं होगी.

इतना ही नहीं मोरटोरियम अवधि खत्म होने के बाद सरकार वित्तीय संकट से जूझ रही इन टेलीकॉम कंपनियों की माली हालत की समीक्षा करेगी इसके बाद स्थिति नहीं सुधरी तो बकाया कर्ज को इक्विटी में तब्दील कर दिया जाएगा. इसका अर्थ यह हुआ कि स्पेक्ट्रम से लेकर एडजेस्टेड ग्रॉस रिवेन्यू का पैसा जो सरकार को मिलना था वह 4 साल बाद मिलना भी संभव नहीं है. यूपीए सरकार के समय 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी में घोटाले का मामला बहुत उछला था. इसमें तत्कालीन दूरसंचार मंत्री को इस्तीफा भी देना पड़ा. उनके खिलाफ जांच भी प्रारंभ की गई. लेकिन यहां तो सरकार ने बाकायदा ऐलान करके खुला खेल खेला है. प्रारंभिक तौर पर 1.92 लाख करोड़ रुपए दांव पर लगा दिए गए हैं. एक तरफ पेट्रोल- डीजल के दाम बेतहाशा बढ़ाए जा रहे हैं और दूसरी तरफ सरकार भारी-भरकम रियायत देते हुए इक्विटी का जोखिम उठाने को तैयार है.

क्या होता है एजीआर

एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) एक तरह की यूजेज और लाइसेंसिग फीस है. ये फीस संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग द्वारा ली जाती है. दूरसंचार विभाग पिछले कई सालों का बकाया मांग रहा है, जिसे देने में टेलीकॉम कंपनियां आनाकानी कर रह थीं.
-आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया है कि टेलीकॉम सेक्टर के ऑटोमेटिक रूट में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी गई है.
– इसके अलावा टेलीकॉम सेक्टर में अब डिजिटल फॉर्मेट में कस्टमर का वेरिफिकेशन होगा. अभी तक डॉक्युमेंट सब्मिट करना होता था लेकिन सरकार के इस फैसले से ग्राहक अब बिना किसी डॉक्युमेंट की हार्डकॉपी के वेरिफिकेशन करा सकेंगे. कागजी ग्राहक अधिग्रहण फॉर्म को डेटा के डिजिटल स्टोरेज से बदल दिया जाएगा.

– इसके अलावा ग्राहकों को प्रीपेड से पोस्टपेड में जाने पर दोबारा केवाईसी की जरूरत नहीं होगी.
– वहीं, टावर के इंस्टॉलेशन सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर हो सकेगा.
– स्पेक्ट्रम नीलामी सामान्यतः प्रत्येक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में आयोजित की जाएगी.
– भविष्य की नीलामी में, स्पेक्ट्रम की अवधि 20 से बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी गई है, भविष्य में प्राप्त स्पेक्ट्रम के लिए 10 वर्षों के बाद स्पेक्ट्रम के सरेंडर की अनुमति दी जाएगी.
2जी से बड़ा घोटाला
राजनीतिक हलकों मैं इसे 2जी से बड़ा घोटाला बताया जा रहा है. स्पेक्ट्रम नीलामी में बढ़ा चढ़कर कंपनियों ने नीलामी में भाग लिया. बैंको से कर्ज लिया. उसके बाद स्पेक्ट्रम शुल्क भी सरकार को नहीं चुकाया. उल्टे सरकार से समय अवधि बढ़वाकर, घाटा बताकर, सरकार से छूट लेने के बाद भी बैंक (Bank) से लिए गए लोन को चुकाने से टेलीकॉम कंपनियां बच रही हैं. 2जी घोटाले को लेकर जिस तरह तत्कालीन विपक्ष ने सरकार को घोटाले के आरोप में घेरा था, वही स्थिति अब वर्तमान सरकार की बन रही है. विपक्ष इस मुद्दे पर आक्रमक हो रहा है.

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